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समावेशी शिक्षा में कक्षा अध्यापक की भूमिका | Role of class teacher in inclusive education

समावेशी शिक्षा में कक्षा अध्यापक की भूमिका | Role of class teacher in inclusive education
समावेशी शिक्षा में कक्षा अध्यापक की भूमिका | Role of class teacher in inclusive education
समावेशी शिक्षा में कक्षा अध्यापक की भूमिका का वर्णन कीजिए।

डॉ. राधाकृष्णन के अनुसार, “अध्यापक का समाज में स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को बौद्धिक संस्कृतियों और तकनीकी कौशलों को पहुँचाने में मुख्य भूमिका अदा करता है और सभ्यता के दीपक को जलाए रखने में मदद करता है। ” समावेशिक प्रणाली में एक अध्यापक की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों को निम्न रूप से लिखा जा सकता है-

  1. बच्चे को उसकी योग्याताओं को विकसित करने हेतु सहायता प्रदान करना।
  2. बच्चों की मानवीय विभिन्नताओं को समझना एवं स्वीकार करना सिखाना।
  3. बच्चे के शारीरिक, संज्ञानात्मक, भावनात्मक एवं सर्वांगीण विकास के लिए उचित अवसर प्रदान करना।
  4. ‘शून्य अस्वीकृति नीति’ के सिद्धांत के तहत प्रत्येक बच्चे का कक्षा-कक्ष में स्वागत करना।
  5. कक्षा-कक्ष गतिविधियों में प्रत्येक बच्चे को प्रतिभागिता के अवसर प्रदान करना।
  6. बाधित बच्चों की समस्याओं को समझने में अभिभावकों, शिक्षा कर्मियों की सहायता करना।
  7. बाधित बच्चों के कल्याण के लिए काम कर रहे व्यावसायिकों से सम्पर्क बनाए रखना।
  8. सामान्य एवं बाधित दोनों प्रकार के बच्चों का समान पाठ्यक्रम उपयोग करने के लिए प्रेरित करना ।
  9. सामान्य बच्चों को बाधित बच्चों को सहयोग देने के लिए तैयार करना ।
  10. सामान्य एवं बाधित बच्चों के बीच मधुर सम्बन्ध बनाना।
  11. बच्चों में आत्म-विश्वास जगाना एवं उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना।

दृष्टि बाधित बालक की शिक्षा में अध्यापक की भूमिका

दृष्टि बाधित बालक कई प्रकार के होते हैं। उदाहरणतः दृष्टिहीन कुछ को कम दिखाई देता है या फिर कई बच्चों की एक ही आँख होती है। इन बच्चों की देख-भाल, प्रशिक्षण एवं शिक्षा, सामान्य एवं संसाधन अध्यापक दोनों का उत्तरदायित्व होता है।

  1. दृष्टि बाधित बच्चों के लिए अध्यापक का सकारात्मक दृष्टिकोण।
  2. शिक्षण में बहुइन्द्रिय नीति का प्रयोग
  3. विशिष्ट उपकरणों जैसे ब्रेल, श्रवण यंत्र आदि का प्रयोग।
  4. भूमिका निर्वाह जैसी शिक्षण विधियों का प्रयोग |
  5. अल्प दृष्टि वाले बच्चों को आगे बिठाना।
  6. सामान्य बच्चों को दृष्टि बाधित बच्चों की समस्याओं से अवगत कराना।
  7. श्याम-पट्ट पर लिखत समय ऊँची आवाज में बोलते हुए पढ़ाना।
  8. यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को चिकित्सक सेवा समय पर मिले।

श्रवण बाधित बच्चों की शिक्षा में अध्यापक की भूमिका

अध्यापक के इस क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य हैं-

  1. बोलते समय बच्चों की ओर देखना।
  2. छोटे वाक्यों का प्रयोग।
  3. धीमी गति से बोलना।
  4. उन्हें श्याम-पट्ट अथवा लेखन सामग्री की सहायता से पढ़ाना।
  5. श्रवण उपकरणों की पूर्ण जानकारी रखना।
  6. बच्चों को शब्द-कोश की जानकारी देना।
  7. उन्हें नवीन तकनीकों से अवगत कराना।
  8. संसाधन अध्यापक, अभिभावकों के सम्पर्क में रहना।

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