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दृष्टि दोष बालक कौन होते हैं? दृष्टि दोष के क्या कारण है।

दृष्टि दोष बालक कौन होते हैं? दृष्टि दोष के क्या कारण है।
दृष्टि दोष बालक कौन होते हैं? दृष्टि दोष के क्या कारण है।

दृष्टि दोष बालक कौन होते हैं? दृष्टि दोष के क्या कारण है। वर्णन किजिए।

दृष्टि दोष बालक कौन होते हैं?

आँख मनुष्य की सबसे महत्वपूर्ण ज्ञानेन्द्री है। हम देखकर जितना ज्ञान प्राप्त करते हैं। उतना ज्ञान हम सुनकर व पढ़कर नहीं कर सकते। जो देख नहीं सकता उसके लिए यह संसार एक अन्धकार के समान है। अगर किसी कारणवश आँख में किसी प्रकार का दोष आ जाता है तो उसके लिए यह जीवन कष्टकर हो जाता है। हम देश-विदेश तथा अपने आस-पास से सम्बन्धित ज्ञान आँखों द्वारा प्राप्त करते हैं। बालक के दृष्टि दोष के कारण दृष्टि दोष शारीरिक. मानसिक, संवेगात्मक और शैक्षिक विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। दृष्टि दोष बालक वह होते हैं जो नंगी आँखों से नजदीक या दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख नहीं पाते । ऐसे बालक ऐनक की सहायता से वस्तुओं को देख सकते हैं तथा पढ़ भी सकते है। इनमे से कुछ बालक ऐसे होते हैं जो विशेष रूप से मोटे अक्षरों में छपी किताबों को पढ़ सकते हैं। इन्हें हम आंशिक रूप से दृष्टि दोष बालक कहते हैं। कुछ बालक जन्म से ही बिल्कुल अन्धे होते हैं। अर्थात उन्हें कुछ भी नजर नहीं आता। कुछ बालक ऐसे भी होते हैं जिनकी आँखों की रोशनी चोट, बीमारी दुर्घटना आदि के कारण चली जाती है तथा वे देखने में अपने आप को असमर्थ पाते हैं। इस प्रकार के बालकों को हम पूर्ण अन्धा कहते हैं ।

दृष्टि दोष बालकों की परिभाषा:- अमेरिका के मेडिकल संघ (1934) ने दृष्टि दोष बालकों की कानूनी परिभाषा दी है। यह परभाषा इस प्रकार है- कानूनी दृष्टि से पूर्ण दृष्टि दोष बालक वह है जिनकी दृष्टि क्षमता सुधार के बाद बेहतर आँख से 20/200 तथा इससे कम हो ।

(2) अथवा जिनकी दृष्टि का क्षेत्र सीमित हो और 20 डिग्री का कोण बनाती है।

भारत सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय ने (1987) ने दृष्टि दोष बालकों को इस प्रकार से परिभाषित किया है-

  • अपनी दृष्टि खो चुके हों।
  • दृष्टि दोष 6/60 या 20/20 से अधिक न हो और चश्मे के प्रयोग से आँख उत्तम हो।
  • दृष्टि का क्षेत्र सीमीत हो और 20 डिग्री कोण बनता हैं।

 उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि सामान्य दृष्टि बालक किसी वस्तु को 200 फुट दूरी से साफ देख सकता है। लेकिन दृष्टि दोष बालक अगर उसी वस्तु 20 फुट की दूरी से स्पष्ट देख सकता है तो हम उसे दृष्टि दोष बालक कहेंगे दृष्टि दोष का परिक्षण स्नेलन चार्ट द्वारा किया जाता है। इन चार्ट का विकास डच डाक्टर हरबर्ट स्नेलन ने किया था। इस चार्ट का प्रयोग दूर दृष्टि दोष को मापने के लिए किया जाता है। नजदीक के दृष्टि दोष के लिए नही किया जाता है। इस चार्ट का पहला अक्षर ‘E’ होता है। सामान्य दृष्टि वाला इस अक्षर को 200 फुट की दूरी से पढ़ लेता है। अगर कोई इसे केवल 20 फुट की दूरी से पढ़ सकता है तो उसे दृष्टि दोष है। उसका दृष्टि दोष 20/200 है।

दृष्टि दोष बालकों को हम निम्नलिखित श्रेणियों में बाँट सकते हैं-

1. आंशिक अन्धे, 2. अन्धे

आंशिक अन्धेः- आंशिक रूप से अन्धे वह बालक होते हैं। जिनको दृष्टि दोष होता है। तथा वह दूर की वस्तुओं को दृष्टि यन्त्रों की सहायता से देख सकते है। आशिक रूप से अन्धे बालकों को हम चार श्रेणियों में बाँट सकते हैं।

  1. ऐसे बालक जिनकी दृष्टि एक्युटि 20/70 या 20/200 के मध्य होती है।
  2. ऐसे बालक जो गंभीर दृष्टि सम्बन्धी कठिनाधयो से पीड़ित है।
  3. ऐसे बालक जो नेत्र रोगों से पीड़ित है तथा यह रोग उनकी दृष्टि को प्रभावित करते है।
  4. ऐसे बालक जो सामान्य मस्तिष्क वाले है। लेकिन डाक्टरी और शिक्षा शास्त्रियों के अनुसार यह बालक कम देखने वाले बालकों को दिए गए साधनों तथा सामान के द्वारा लाभान्वित हो सकते हैं।

अन्धे:- ऐसे बालक जो जन्म से ही अन्धे होते हैं। या जन्म के पश्चात किसी चोट दुर्घटना बिमारी के कारण उनके नेत्रों की ज्योति चली जाती है। यह बालक सुनकर या ब्रेल लिपि के द्वारा ही पढ़ सकते हैं। इनको पूर्णतया अपनी ज्ञानेन्द्रियों पर निर्भर रहना पड़ता है।

दृष्टि बाधिता के कारण:-

अन्धापन एक अभिशाप है क्योंकि अन्धे के लिए यह संसार एक अन्धकार है। देखकर ही मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है। आँखें बहुत अनमोल हैं। हमे इनकी देखभाल अच्छी तरह से करनी चाहिए। दृष्टि बाधिता के निम्नलिखित कारण हो सकते है-

1. वंशानुगत प्रभाव:- बड़ों का प्रभाव बच्चों पर अवश्य पड़ता है। कई बार देखा गया है। कि अगर माँ बाप में से किसी एक को दृष्टि दोष है तो इसका असर आने वाली सन्तान पर पड़ता है। यह दोष फिर पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।

2. संक्रामक रोग:- प्राय: संक्रामक रोगों के कारण आँखों की रोशनी पर प्रभाव पड़ता है। जो कि बाद मे दृष्टि दोष का कारण बन जाता है। हमें संक्रामक रोगों से सावधानी रखनी चाहिए।

3. साधारण बीमारी:- कभी-कभी साधारण बीमारी भी दृष्टि दोष का कारण बन जाती है। शुगर वाले व्यक्ति को प्रायः दृष्टि दोष हो जाता है।

4. चोट व दुर्घटना:- कई बार आँख पर चोट लगने के कारण दृष्टि दोष हो जाता है। या फिर कोई दुर्घटना इसका कारण बन सकती है।

5. जहर का असर:- कई बार छोटा बच्चा घर में रखी दवाई या कोई जहरीली वस्तु को खा जाता है जो कि दृष्टि दोष का कारण बन जाती है। पेन्ट, शीशा, नीला थोथा आदि इसके उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त आँख में किसी नुकीली वस्तु का लगना, लापरवाही से बम आदि का लगना, होली पर पानी के गुब्बारे आदि का लगना भी दृष्टि दोष का कारण बन जाता है।

6. जन्म से अन्धापन:- कुछ बच्चे जन्मजात अन्धे होते हैं। कुछ केसों में देखा गया है। कि उनकी आँखें ही नहीं होती तथा कुछ केसों में यह पाया गया है कि उनकी आँखें तो होती हैं लेकिन उनमें ज्योति नहीं होती या बहुत कम होती है।

7. जन्म के पश्चातः- कई बार दाई या आया की लापरवाही से बच्चे को दृष्टि दोष हो सकता है। गिरने, गलत दवाई के प्रयोग या आहार की कमी के कारण भी दृष्टि दोष संभव हो सकता है।

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