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प्रकृतिवादी और आदर्शवादी शिक्षा व्यवस्था में क्या अन्तर है?

प्रकृतिवादी और आदर्शवादी शिक्षा व्यवस्था में क्या अन्तर है ?
प्रकृतिवादी और आदर्शवादी शिक्षा व्यवस्था में क्या अन्तर है ?

प्रकृतिवादी और आदर्शवादी शिक्षा व्यवस्था में क्या अन्तर है?

प्रकृतिवादी और आदर्शवादी शिक्षा में अन्तर (Difference between Naturalism and Idealism Education )

(A) दार्शनिक अन्तर (Philosophical Differences)

आदर्शवाद के अनुसार परमात्मा सत्यम् शिवम्, सुन्दरम् के गुणों से युक्त है जबकि प्रगतिवादी परमात्मा के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं करते।

1. आदर्शवादी मनुष्य के माध्यमिक तथा नैतिक पहलू पर जोर देता है। मनुष्य पृथ्वी में सबसे पहले श्रेष्ठ आदर्शात्मक तथा बुद्धिमान है जबकि प्रकृतिवाद के अनुसार मनुष्य पृथ्वी का सबसे उच्चतम पशु है। इसका स्पष्टीकरण परिणामस्वरूप दृष्टि से अन्तर है।

2. आदर्शवाद विचारों या आध्यात्मिकता को अन्तिम सत्ता मानता है जबकि प्रकृतिवाद भौतिक तत्व को अन्तिम सत्ता मानते हैं।

3. आदर्शवाद सांसारिक विकास को विशिष्ट उद्देश्य या प्रयोजन मानता है। यह विकास शाश्वत आदर्शों की ओर रहा है जबकि प्रकृतिवाद सांसारिक विकास को एक प्रक्रिया मात्र मानता है। यह विश्वास यन्त्रवत है और इसका कोई उददेश्य नहीं है।

4. आदर्शवाद का दृष्टिकोण नैतिक तथा आध्यात्मिक है। प्रकृतिवाद का दृष्टिकोण यान्त्रिक व भौतिक है।

5. आदर्शवाद मनुष्य की नैसर्गिक प्रवृत्तियों को विशेष महत्व न देकर उनके शोधन तथा दमन के लिए कहते हैं, प्रकृतिवादी मनुष्य की नैसर्गिक प्रवृत्तियों को ही सर्वश्रेष्ठ तथा नैसर्गिक मानते थे।

(B) शैक्षणिक अन्तर (Educational Difference)

1. आदर्शवाद शाश्वत मूल्यों, धर्म, आदर्श इत्यादि को सामने रखकर पाठ्यक्रम का निर्माण करते हैं जबकि प्रकृतिवादी पाठ्यक्रम के निर्माण में बालक को नैसर्गिक प्रवृत्तियों, रुचियों, व्यक्तियों विभिन्नताओं इत्यादि को बहुत महत्व देते हैं।

2. आदर्शवाद के विचार के अनुसार शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य आत्मानुभूति व नैतिकता शाश्वत मूल्यों को प्राप्ति तथा पूर्णदर्श को प्राप्त करना है जबकि प्रकृतिवाद के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य आत्म प्रकाशन नैसर्गिक प्रवृत्तियों का शोध एवं भागन्तीकरण करना जीवन संघर्ष के योग्य बनाना जातीय प्राप्तियों की संरक्षण आदि है।

3. आदर्शवाद बालक की शिक्षा में शिक्षकों को वही स्थान देते हैं जो एक सुकोमल पौधे को विकसित करने के लिए माली का स्थान है। प्रकृतिवादी शिक्षा में शिक्षक सहायक मित्र तथा सहायक के रूप में देते हैं। इस प्रकार शिक्षक का स्थान गौण होता है।

4. आदर्शवादी प्रश्नोत्तर, वाद-विवाद तथा व्याख्यान विधि पर विशेष जोर देते हैं जो शिक्षक तथा शिक्षार्थी दोनों के सहयोग पर निर्भर है जबकि प्रकृतिवादी करके सीखने, स्वानुभव द्वारा सीखने, प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा सीखने खेल द्वारा सीखने इत्यादि सिद्धान्तों पर अपनी शिक्षण विधियों का निर्माण करते है।

5. आदर्शवादी धर्म, नैतिकता, साहित्य इत्यादि विषयों को महत्व देते हैं जबकि प्रकृतिवादी जीवन रक्षा सम्बन्धी विषयों जैसे शरीर विकास, विज्ञान, पदार्थ गणित, भूगोल इत्यादि को अधिक महत्व देते हैं।

6. आदर्शवाद शिक्षा पद्धति के बजाय शिक्षा के उद्देश्य के सम्बन्ध में अधिक विचार करते हैं जबकि प्रकृतिवादी शिक्षण पद्धतियों के निर्माण को महत्वपूर्ण स्थान देते हैं।

7. आदर्शवाद सत्य की खोज के लिए निगमन तथा वाद विवाद की पद्धति को सर्वोत्तम मानते हैं जबकि प्रकृतिवादी आगमन तथा जीव वैज्ञानिक पद्धति को सर्वोत्तम मानते हैं।

8. आदर्शवादी सहशिक्षा के दुष्परिणामों की बातों को रखते हैं, प्रकृतिवादी सह शिक्षा का समर्थन करते हैं।

9. आदर्शवादी प्रभावात्मक अनुशासन को सर्वश्रेष्ठ समझते हैं जबकि प्रकृतिवादी मुक्तयात्मक अनुशासन की खोज के लिए निगमन तथा वाद-विवाद की पद्धति को सर्वोत्तम मानते हैं। प्रकृतिवादी आगमन तथा जीव वैज्ञानिक को सर्वोत्तम मानते थे।

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