डॉ. मनमोहन सिंह पर निबन्ध | Essay on Dr. Manmohan Singh in Hindi
प्रस्तावना
विशाल गणराज्य भारत देश बहुत महान तथा विशाल है। जहाँ एक ओर ऋषियों, मुनियों तथा तपस्वियों ने अनेक साधनाएँ की हैं वही दूसरी ओर अनेक वैज्ञानिकों ने भारत को उन्नति के शिखर पर पहुँचाया। हमारे देश में प्रजातन्त्रीय प्रणाली के अनुसार संसद का चुनाव होता है तथा चुनाव के उपरान्त देश को प्रधानमन्त्री की भी आवश्यकता होती है।
स्वतन्त्र भारत में अब तक संसद को प्रधानमन्त्री के रूप में पं. जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गाँधी, मोरारजी देसाई, चौ. चरण सिंह, राजीव गाँधी, वी.पी. सिंह, चन्द्र शेखर, पी.वी. नरसिम्हाराव, एच.डी. देवप्पड़ा, इन्द्र कुमार गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी मिले। इसी बीच संसद में दो बार तेरह-तेरह दिन के लिए गुलजारी लाल नन्दा को कार्यकारी प्रधानमन्त्री नियुक्त किया जा चुका है। चौदहवीं लोकसभा में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमन्त्री बने हैं पंद्रहवीं लोकसभा में पुनः डॉ. मनमोहन सिंह को ही प्रधानमंत्री बनने का सुअवसर प्राप्त हुआ हैं आपने 22 मई, 2009 को सायं 5.30 बजे माननीय राष्ट्रपति तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
जन्म परिचय एवं शिक्षा
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर, 1932 को पंजाब (पाकिस्तान) में ‘गाह’ नामक स्थान पर हुआ था। आपके पिता का नाम सरदार गुरुमुख सिंह तथा माता को नाम अमृत कौर था। आपकी केवल तीन बहनें हैं।
मनमोहन सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा एक स्थानीय तथा निकटवर्ती क्षेत्रीय स्कूल में हुई थी। सन् 1952 में आपने पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1954 में आपने पंजाब विश्वविद्यालय से ही अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। सेंट जोंस कॉलेज कैम्ब्रिज ने 1957 में पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन के लिए आपको पुरस्कृत किया। तत्पश्चात् आपने 1957 में पी.एच.डी. का शोध कार्य ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से किया। डॉ. मनमोहन सिंह को अनेक यूनिवर्सिटीयों ने डी.लिट. की उपाधियाँ प्रदान की। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़; गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर; दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली चौधरी चरणसिंह, हरियाणा; एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार; श्री बैंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, तिरुपति; यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रोहोगा, इटली आदि इनमें प्रमुख हैं।
डॉ. मनमोहन सिंह ने लेक्चरर तथा रीडर के रूप में 1957 से 1965 तक पंजाब विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य किया। 1969 में डॉ. सिंह दिल्ली स्कूल ऑफ इकनोमिक्स में नियुक्त हो गए। आपने सन् 1971 तक वहाँ सेवा की। आपने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी अपनी अवैतनिक सेवाएँ दी। डॉ. मनमोहन सिंह का विवाह 14 दिसम्बर 1958 को गुरुशरन कौर से हुआ था; जिनसे इनकी तीन पुत्रियाँ हुई।
व्यक्तित्व की विशेषताएँ-
डॉ. मनमोहन सिंह उच्च कोटि के शिक्षित व्यक्ति हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र में अनेक पुस्तकें लिखी हैं, जो देशवासियों का मार्गदर्शन करती हैं। आपने वित्तीय सलाहकार, प्रमुख अर्थशास्त्र सलाहकार, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर तथा अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विदेश नीति सलाहकार के रूप में राष्ट्र की सेवाएँ की हैं। आपने भारतीय आणविक ऊर्जा आयोग, योजना आयोग, अन्तरिक्ष आयोग, ऐशियन बैंक विकास क्षेत्रों में भी कार्य किया है। आपने वित्त (कैबिनेट) मन्त्री के रूप में भी देश की अनूठी सेवा की है। आप राज्य सभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं।
हमारे सुयोग्य प्रधानमन्त्री अत्यन्त साधारण, सहयोगी तथा सुशिक्षित है। इन सभी गुणों के उपरान्त भी आपमें लेशमात्र भी घमंड या अहंकार नहीं है। गुरमुख सिंह डॉ. मनमोहन सिंह को अनेक डिग्रियाँ तथा पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। आपकी गम्भीरता तथा कठोर परिश्रमी स्वभाव को देखते हुए आपके पिता जी ने एक बार अपने आशीर्वाद के रूप में कहा था, “मोहन, तू एक दिन भारत का प्रधानमन्त्री अवश्य बनेगा।” इस आशीर्वाद को फलीभूत होने में भले ही तीस वर्ष का समय लग गया, परन्तु उनका यह आशीर्वाद उस समय पूर्ण हुआ जब 21 मई, 2004 को टी.टी.जी.पी. की अध्यक्षा सोनिया गाँधी जी ने प्रधानमन्त्री पद को अस्वीकार करते हुए डा. मनमोहन सिंह के नाम की सिफारिश की। डॉ. मनमोहन सिंह ने शनिवार 22 मई, 2004 को भारत के प्रधानमन्त्री के रूप में शपथ ग्रहण की। आपके साथ मन्त्रीमंडल में 67 मन्त्रियों को भी शपथ दिलाई गई।
उपसंहार
डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी अनगिनत सेवाओं के लिए भारत सरकार की ओर से सन् 1987 में देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पदम विभूषण’ प्रदान किया गया। 1993 में आपको ‘यूरोमनी अवार्ड फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया।
निःसन्देह डॉ. मनमोहन सिंह एक नेक, विनीत तथा ईमानदार व्यक्ति हैं। राष्ट्र ने उनसे जो भी आशाएँ रखी थी, उन कसौटियों पर वे खरे उतरे हैं। अभी जनवरी 2009 में डॉ. मनमोहन सिंह को दिल की सर्जरी करानी पड़ी, जिसके कारण वे अखिल भारतीय अनुसंधान आयोग’ में दाखिल रहे। ऐसे कठिन समय में सभी देशवासियों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थनाएँ की। हमारी तो ईश्वर से बस यही कामना है कि वह उन्हें लम्बी आयु दें।
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