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सामाजिक वंचितों से आप क्या समझते हैं? इनके शैक्षिक अवसरों की समानता का क्या महत्व है ?

सामाजिक वंचितों से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के अवसरों की समानता का महत्व
सामाजिक वंचितों से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के अवसरों की समानता का महत्व

सामाजिक वंचितों से आप क्या समझते हैं?

सामाजिक वंचितों से आप क्या समझते हैं?– हमारे समाज में अनेक सामाजिक समूह पाये जाते हैं। जिनकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति पर्याप्त भिन्न है। कुछ समूह सामाजिक दृष्टि से श्रेष्ठ स्वीकार किये जाते हैं तथा समाज में उनको पर्याप्त मान-सम्मान है, लेकिन कुछ ऐसे भी समूह हैं जिन्हें सामाजिक दृष्टि से निम्न माना। जाता है, वे आर्थिक दृष्टि से भी पिछड़े हुए होते हैं। इन समूहों के अनेक लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन व्यतीत करने को विवश हैं। इन समूहों को हम समाज के दुर्बल वर्ग की संज्ञा दे सकते। हैं। हम कह सकते हैं, “सामाजिक स्तरीयकरण के अन्तर्गत निम्न सामाजिक स्थिति वाले तथा दुर्बल वर्गों को समाज में हीन दृष्टि से देखा जाता है। उच्च वर्ग को मिली हुई सामाजिक सुविधाओं, जैसे उच्च वर्ग के लोगों के साथ उठना-बैठन, एक साथ भोजन करना, घोड़े पर सवारी करना, सवर्ण व्यक्ति के साथ पड़ोस में रहना, एक कुएँ से पानी लेना, से भी इन्हें वंचित कर दिया जाता है। इससे हम इन्हें सामाजिक दृष्टि से वंचित भी कहते हैं।

समाज के अन्य वर्ग इस वर्ग से दूरी बनाये रखते हैं इस वर्ग के लोगों को कदम-क़दम पर सामाजिक तिरस्कार का भी सामना करना पड़ता है। भारतीय समाज के ऊँच-नीच, छुआछूत आदि बुराइयों का शिकार यही दुर्बल वर्ग या सामाजिक दृष्टि से वंचित वर्ग है। यह वर्ग जहाँ समाज की सबसे निम्न पायदान पर खड़ा है, वहाँ यह शिक्षा की छाया से भी वंचित है। समाज के इस दुर्बल वर्ग में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्ग के लोग सम्मिलित हैं। इनकी संख्या काफी है, इसलिए ये अब अपने को ‘बहुजन’ समाज के नाम से पुकारते हैं। कुछ लोग इस वर्ग को दलित की संज्ञा देते हैं।

समानता का अर्थ है कि विशेष अधिकार वाला वर्ग न रहे और सबको उन्नति के समान अवसर मिले। शैक्षिक अवसरों की समानता का तात्पर्य सभी के लिए एक समान शिक्षा नहीं है, बल्कि प्रत्येक बालक की शारिरिक, मानसिक, नैतिक परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करना है। इसका तात्पर्य राज्य द्वारा व्यक्तियों की शिक्षा के संदर्भ में जाति, रंग, रूप, प्रान्तीयता एवं भाषा-धर्म आदि के मध्य भेदभाव न करने से भी है।

इस प्रकार शैक्षिक अवसरों की समानता से हम निम्न बातें समझते हैं-

1. शैक्षिक अवसरो की समानता का अर्थ बच्चे के शैक्षिक अवसर अभिभावकों की आर्थिक अवस्था या निवास स्थान जुड़े न हों।

2. बच्चे को अपनी क्षमताओं के अधिकतम विकास का अवसर मिले।

3. सरकार प्रत्येक नागरिक के लिए शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराये।

4. सभी बालक एक न्यूनतम शैक्षिक योग्यता प्राप्त कर सकें।

5. प्रत्येक छात्र शिक्षा ग्रहण कर जीवन में सफलता प्राप्त कर सके।

इस प्रकार दूरस्थ क्षेत्रों के निर्धनतम घर के अक्षम बालक को शिक्षा के शीर्ष पर पहुँचाना अवसरों की समानता है।

शिक्षा के अवसरों की समानता का महत्व

1. शिक्षा मौलिक अधिकार है- शिक्षा प्राप्त करना मनुष्य का मौलिक अधिकार है। मानवाधिकारों के घोषणापत्र में भी शिक्षा प्राप्त करना बालक का मौलिक अधिकार माना जाता है। भारतीय संदर्भ में भी सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा प्राप्त करना एक मौलिक अधिकार माना है। शिक्षाविहीन व्यक्ति पूँजीविहीन पशु की तरह होता है अतः शिक्षा प्राप्त करने के समान अवसर प्रत्येक बालक को उपलब्ध होने चाहिए।

2. बालक के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास- शिक्षा बालक के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है। उसका मानसिक व बौद्धिक विकास शिक्षा प्राप्ति के बाद ही होता है। शिक्षा प्राप्त कर वह अपना आर्थिक स्तर भी उन्नत कर सकता है। उन्नत आर्थिक स्तर उसे समाज में प्रतिष्ठा दिलाता है। इस प्रकार बालक के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के समान अवसरों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

3. प्रजातंत्र की सफलता- प्रजातंत्र की सफलता अच्छे व सुयोग्य नागरिकों पर निर्भर होती है। किसी भी तरह की विषमता प्रजातंत्र पर कुठाराघात करती है क्योंकि प्रजातंत्र का आधार ही समानता है। अतः यदि प्रजातंत्र को सफल होना है तो अपने नागरिकों को विकसित होने का समान अवसर उपलब्ध कराना ही होगा। इनमें पहला शैक्षिक अवसरों की समानता है।

4. राष्ट्र का विकास- किसी भी राष्ट्र का विकास उसके नागरिकों पर ही निर्भर करता है। राष्ट्र के विकास की शक्ति शिक्षा ही है। शिक्षित नागरिक देश के उत्पादन को बढ़ाकर आर्थिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। अपने ज्ञान व विवेक से विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम होते हैं। अतः यह राष्ट्र का दायित्व है कि नागरिकों को बिना जाति, धर्म, रंग आदि के भेव के शिक्षा का समान अवसर उपलब्ध कराये।

5. सामाजिक एकीकरण-शिक्षा सामाजिक एकीकरण का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। एकीकृत समाज बंद मुट्ठी की तरह है, जो बड़े से बड़ा प्रहार झेलने की क्षमता रखता है। शिक्षा ही बालक को नागरिक व सामाजिक कर्त्तव्यों का बोध कराती है, वातावरण के साथ समायोजन करना सिखाती है। अतः शैक्षिक अवसरों की समानता का महत्व स्वतः प्रमाणित है।

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