हिन्दी / Hindi

अनुवाद के प्रकार पर विस्तार से लेख लिखिए। Article on types of Translation

अनुवाद के प्रकार पर विस्तार से लेख लिखिए।
अनुवाद के प्रकार पर विस्तार से लेख लिखिए।

अनुवाद के प्रकार पर विस्तार से लेख लिखिए।

अनुवाद के प्रकार

गद्य-पद्य पर आधारित प्रभेद :

1.गद्यानुवाद- गद्यानुवाद सामान्यतः गद्य में किए जाने वाले अनुवाद को कहते हैं। किसी भी ग्द्य रचना का गद्य में ही किया जाने वाला अनुवाद गद्यात्मक कहलाता है। किन्तु कुछ विशेष कृतियों का पद्य से गद्य में भी अनुवाद किया जाता है। जैसे-‘मेघदूतम्’ का हिन्दी कवि नागार्जुन द्वारा किया गया गद्यानुवाद।

2.पद्यानुवाद- पद्य का पद्य में ही किया गया अनुवाद पद्यानुवाद की श्रेणी में आता है। दुनिया भर में विभिन्न भाषाओं में लिखे गये काव्यों एवं महाकाव्यों के अनुवादों की संख्या अत्यन्त विशाल है। इलियट के ‘वेस्टलैण्ड’, कालिदास के ‘मेघदूतम्’ एवं ‘कुमारसंभवम्’ तथा टैगोर की ‘गीतांजलि’ का विभिन्न भाषाओं में पद्यानुवाद किया गया है। साधारणतः पद्यानुवाद करते समय स्रोत-भाषा में व्यवहृत छन्दों का ही लक्ष्य-भाषा में व्यवहार किया जाता है।

3. छन्दमुक्तानुवाद- इस प्रकार के अनुवाद में अनुवादक को स्रोत-भाषा में व्यवहार किए गए छन्दों को अपनाने की बाध्यता नहीं होती। अनुवादक विषय के अनुरूप लक्ष्य- भाषा का कोई भी छन्द चुन सकता है। साहित्य में ऐसे अनुवाद विपुल संख्या में उपलब्ध हैं।

साहित्य विधा पर आधारित प्रभेद :

1. काव्यानुवाद – स्रोत-भाषा में लिखे गये काव्य का लक्ष्य-भाषा में रूपान्तरण काव्यानुवाद कहलाता है। यह आवश्यकतानुसार गद्य, पद्य एवं मुक्त छन्द में किया जा सकता है। होमर के महाकाव्य ‘इलियड’ एवं कालिदास के ‘मेघदूतम’ एवं ‘ऋतुसंहार’ इसके उदाहरण हैं।

2. नाट्यानुवाद : किसी भी नाट्य कृति का नाटक के रूप में ही अनुवाद करना नाट्यानुवाद कहलाता है। नाटक रंगमंचीय आवश्यकताओं एवं दर्शकों को ध्यान में रखकर लिखा जाता है। अतः इसके अनुवाद के लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है। संस्कृत के नाटकों के हिन्दी अनुवाद तथा शेक्सपियर के नाटकों के अन्य भाषाओं में किए गए अनुवाद इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

3. कथा अनुवाद : कथा अनुवाद के अन्तर्गत कहानियों एवं उपन्यासों का कहानियों एवं उपन्यासों के रूप में ही अनुवाद किया जाता है। विश्व प्रसिद्ध उपन्यासों एवं कहानियों के अनुवाद काफी प्रचलित एवं लोकप्रिय हैं। मोपासाँ एवं प्रेमचन्द की कहानियों का दुनिया की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ।

रूसी उपन्यास ‘माँ’, अंग्रेजी उपन्यास ‘लैडी चैटी का प्रेमी’ तथा हिन्दी में ‘गोदान’, ‘त्यागपत्र’ तथा ‘नदी के द्वीप’ के विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुए हैं।

4. अन्य साहित्यिक विधाओं के अनुवाद : अन्य साहित्यिक विधाओं के अन्तर्गत रेखाचित्र, निबन्ध, संस्मरण, रिपोर्ताज, डायरी एवं आत्मकथा आदि के अनुवाद आते हैं। अनुवाद में विषय है। पं0 जवाहर लाल नेहरू की कृति ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ तथा महात्मा गांधी एवं शीरयंत्रण राय बच्चन की आत्मकथाओं के विभिन्न भाषाओं में किए गए अनुवाद इसी श्रेणी के अन्तर्गत आते हैं।

विषय आधारित प्रभेद :

1.ललित साहित्यानुवाद : ललित साहित्यानुवाद के अन्तर्गत साहित्यिक विधाओं को रखा जाता है। कविता, ललित निबन्ध, कहानी, डायरी, आत्मकथा उपन्यास आदि। इसकी चर्चा ऊपर की जा चुकी है।

2.धार्मिक-पौराणिक साहित्यानुवाद : जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि धार्मिक पौराणिक साहित्यानुवाद में विभिन्न धर्मों के मानक धर्मग्रन्थों, गीता, भागवत, कुरान, बाइबिल आदि का अनुवाद किया जाता है। वेद, उपनिषद आदि भी इसके साथ शामिल हैं।

3. वैज्ञानिक एवं तकनीकी सामग्री के अनुवाद : वैज्ञानिक एवं तकनीकी मुख्य है और शैली गौण। साहित्यिक अनुवाद में प्रायः ‘क्यों’ से ज्यादा कैसे’ का महत्व होता है जबकि वैज्ञानिक अनुवाद में कैसे’ से ज्यादा ‘क्या’ का महत्व होता है। इसमें भावानुवाद त्याज्य है और प्रायः शब्दानुवाद अपेक्षित है। इसमें पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग अपेक्षित है, ध्वन्यात्मक या व्यंग्यात्मक शब्दावली का नहीं। कुल मिलाकर इस प्रकार के अनुवाद में सूचना, संकल्पना तथा तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुवाद में अनुवादक विषय का सम्यक जानकार और साथ ही प्रशिक्षित भी, तभी वह अनुवाद के साथ न्याय कर पाएगा।

4. विधि का अनुवाद : इसमें एक भाषा की विधि सम्बन्धी अर्थात् कानून की सामग्री को दूसरी भाषा में अनुवाद किया जाता है। कानून की किताबें, अदालत के मुकदमें, तत्सम्बन्धी विभिन्न आवेदन-पत्र, कानूनी संहिताएं, नियम-अधिनियम, संशोधित अधिनियम आदि कानूनी अनुवाद के प्रमुख हिस्से हैं। इस प्रकार के अनुवाद में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। इसमें भावार्थ नहीं शब्दार्थ महत्वपूर्ण होता है। इसके प्रत्येक शब्द का अर्थ स्पष्ट होता है। एक शब्द का एक ही अर्थ अपेक्षित होता है। इस प्रकार के अनुवाद की भाषा पूरी तरह तकनीकी प्रकृति की होती है।

5.प्रशासनिक अनुवाद : प्रशासनिक अनुवाद से तात्पर्य है वह अनुवाद जिसमें एक भाषा की प्रशासन सम्बन्धी सामग्री को दूसरी भाषा में परिवर्तित किया जाता है। प्रशासनिक अनुवाद का सम्बन्ध सरकारी कार्यालयों से होने के कारण इसे कार्यालयी अनुवाद भी कहा जाता है। इस अनुवाद के अन्तर्गत प्रशासन के सभी कागजात, सरकारी पत्र, परिपत्र, सूचनाएं- अधिसूचनाएं, नियम-अधिनियम, प्रेस विज्ञप्तियाँ आदि आते हैं। केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, संसद, विभिन्न मंत्रालय आदि में द्विभाषी तथा बहुभाषी स्थिति कारण प्रशासनिक अनुवाद के बिना काम नहीं चलता । यहाँ भी पारिभाषिक शब्दावली का सहारा लिया जाता है। प्रशासनिक अनुवाद में ‘कथ्य’ अर्थात् ‘कही गई बात’ महत्वपूर्ण होती है।

6. मानविकी एवं समाजशास्त्र का अनुवाद : मानविकी एवं समाजशास्त्र से सम्बन्धित सामग्रियों के अनुवाद के लिए अनुवादक का विषय ज्ञान अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। इस तरह का अनुवाद अनुसंधान, सर्वेक्षण, परियोजना एवं शैक्षिक आवश्यकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस तरह के अनुवाद में सरलता एवं स्पष्टता अपेक्षित होती है।

7.संचार माध्यमों की सामग्री का अनुवाद : वर्तमान युग के संचार माध्यमों ने मानव-विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया है। संचार माध्यमों के जरिए ही वह देश-विदेश और समग्र दुनिया की जानकारी हासिल करता है। किन्तु विविध देशों में विविध भाषाएं होने के कारण संचार माध्यम की सामग्री का अनुवाद महत्वपूर्ण बना हुआ है। इस अनुवाद के अन्तर्गत मुख्यतः दैनिक समाचार, सभी प्रकार की पत्र-पत्रिकाओं, दूरदर्शन तथा आकाशवाणी आदि क्षेत्रों की सामग्री के अनुवाद आते हैं। इन सम्पर्क माध्यमों में दुनिया के सारे ज्ञान-विज्ञान की सामया समाहित होती है।  इसमें राजनीति, व्यापार, खेल, विज्ञान, साहित्य आदि की अर्थात् जीवन से सम्बन्धित सभी विषय -क्षेत्रों की सामग्री होती है।

उपर्युक्त प्रकारों के अलावा विषयाधारित अनुवाद में संगीत, ज्योतिष, पर्यावरण, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अभिलेखों, गजेटियरों आदि की सामग्री, वाणिज्यानुवाद, काव्यशास्त्र भाषाविज्ञान सम्बन्धी अनेकानेक विषयों को शामिल किया जा सकता हैं।

अनुवाद की अन्य प्रकृति पर आधारित प्रभेद

1.मूलनिष्ठ : मूलनिष्ठ अनुवाद कथ्य और शैली दोनों की दृष्टि से मूल का अनुगमन करता है। इस प्रकार के अनुवाद में अनुवादक का प्रयास रहता है कि अनूदित विचार या कृत्ति स्रोत-भाषा के विचारों एवं अभिव्यक्ति के निकट रहे।

2. मूलमुक्त : मूलमुक्त अनुवाद को भोलानाथ तिवारी ने मूलाधारित अथवा मूलाधृत अनुवाद भी कहा है। वैसे तो मूलमुक्त का अर्थ ही होता है मूल से हटकर, किन्तु किसी भी अनुवाद में विचारों के स्तर पर परिवर्तन की गुंजाइश नहीं होती। अतः यहाँ मूल से भिन्न का अर्थ है शैलीगत भिन्नता तथा कहावतों एवं उपमानों का देशीकरण करने की अनुवादक की स्वतंत्रता।

अनुवाद के कुछ अन्य प्रभेद-

1. शब्दानुवाद- स्रोत-भाषा के शब्द एवं क्रम को उसी प्रकार लक्ष्य-भाषा में रूपान्तरित करना शब्दानुवाद कहलाता है। यहाँ अनुवादक का लक्ष्य मूल-भाषा के विचारों को रूपान्तरित करने से अधिक शब्दों का यथावत् अनुवाद करने से होता है। शब्द एवं शब्द क्रम की प्रकृति हर भाषा में भिन्न होती है। अतः यांत्रिक ढंग से उनका यथावत् अनुवाद करते जाना काफ़ी कृत्रिम, दुर्बोध्य एवं निष्प्राण हो सकता है। शब्दानुवाद उच्च कोटि के अनुवाद की श्रेणी में नहीं आता।

2.भावानुवाद- साहित्यिक कृतियों के संदर्भ में भावानुवाद का विशेष महत्व होता है। इस प्रकार के अनुवाद में मूल-भाषा के भावों, विचारों एवं सन्देशों को- लक्ष्य-भाषा में रूपान्तरित किया जाता है। इस सन्दर्भ में भोलानाथ तिवारी का कहना है : ‘मूल सामग्री यदि सूक्ष्म भावों वाली है तो उसका भावानुवाद करते हैं।’ भावानुवाद में सम्प्रेषणीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसमें अनुवादक का लक्ष्य स्रोत-भाषा में अभिव्यक्त भावों, विचारों एवं अर्थों का लक्ष्य- भाषा में अन्तरण करना होता है। संस्कृत साहित्य में लिखे गए कुछ ललित निबन्धों के हिन्दी अनुवाद बहुत ही सफल सिद्ध हुए हैं।

3.छायानुवाद- अनुवाद सिद्धान्त में छाया शब्द का प्रयोग अति प्राचीन है। इसमें मूल-पाठ की अर्थ छाया को ग्रहण कर अनुवाद किया जाता है। छायानुवाद में शब्दों, भावों तथा संकल्पनाओं के संकलित प्रभाव को लक्ष्य-भाषा में रूपान्तरित किया जाता है। संस्कृत में लिखे गए भास के नाटक ‘स्वप्नवासवदत्तम्’ एवं कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के हिन्दी अनुवाद इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

4.सारानुवाद- सारानुवाद का अर्थ होता है किसी भी विस्तृत विचार अथवा सामग्री का संक्षेप में अनुवाद प्रस्तुत करना। लम्बी रचनाओं, राजनैतिक भाषणों, प्रतिवेदनौं आदि व्यावहारिक कार्य के अनुवाद के लिए सारानुवाद काफ़ी उपयोगी सिद्ध होता है। इस प्रकार के अनुवाद में मूल-भाषा के कथ्य को सुरक्षित रखते हुए लक्ष्य-भाषा में उसका रूपान्तरण कर दिया जाता है। सारानुवाद का प्रयोग मुख्यतः दुभाषिए, समाचार पत्रों एवं दूरदर्शन के संवाददाता तथा संसद एवं विधान मण्डलों के रिकार्डकर्ता करते हैं।

5. व्याख्यानुवाद- व्याख्यानुवाद को भाष्यानुवाद भी कहते हैं। इस प्रकार अनुवाद में अनुवादक मूल सामग्री के साथ-साथ उसकी व्याख्या भी प्रस्तुत करता है। व्याख्यानुवाद के में अनुवादक का व्यक्तित्व महत्वपूर्ण होता है और कई जगहों में तो अनुवादक का व्यक्तित्व एवं विचार मूल रचना पर हावी हो जाता है। बाल गंगाधर तिलक द्वारा किया गया ‘गीता’ का अनुवाद इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।

6.आशु अनुवाद- आशु अनुवाद को वार्तानुवाद भी कहते हैं। दो भिन्न भाषाओं, भावों एवं विचारों का तात्कालिक अनुवाद आशु अनुवाद कहलाता है। आज जैसे विभिन्न देश एक-दूसरे के परस्पर समीप आ रहे हैं इस प्रकार के तात्कालिक अनुवाद का महत्व बढ़ रहा है। विभिन्न भाषा-भाषी प्रदेशों एवं देशों के बीच राजनैतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व के क्षेत्रों में आशु अनुवाद का सहारा लिया जाता है।

7.आदर्श अनुवाद- आदर्श अनुवाद को सटीक अनुवाद भी कहा जाता है। इसमें अनुवादक आचार्य की भूमिका निभाता है तथा स्रोत-भाषा की मूल सामग्री का अनुवाद अर्थ एवं अभिव्यक्ति सहित लक्ष्य-भाषा में निकटतम एवं स्वाभाविक समानार्थों द्वारा करता है। आदर्श अनुवाद में अनुवादक तटस्थ रहता है तथा उसके भावों एवं विचारों की छाया अनूदित सामग्री पर नहीं पड़ती है। रामचरितमानस, भगवद् गीता, कुरान आदि धार्मिक ग्रन्थों के सटीक अनुवाद
इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

8.रूपान्तरण- आधुनिक युग में रूपान्तरण का महत्व बढ़ रहा है। रूपान्तरण में स्रोत-भाषाा की किसी रचना का अन्य विधा (साहित्य रूप) में रूपान्तरण कर दिया जाता है। संचार माध्यमों के बढ़ते हुए प्रभाव एवं उसकी लोकप्रियता को देखते हुए कविता, कहानी आदि साहित्य रूपों का नाट्यानुवाद विशेष रूप से प्रचलित हो रहा है। ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी रुचि एवं कृति की लोकप्रियता महत्वपूर्ण होती है। जैनेन्द्र, कमलेश्वर, अमृता प्रीतम, भीष्म साहनी आदि की कहानियों के रेडियो रूपान्तरण प्रस्तुत किए जा चुके हैं। ‘कामायनी’ महाकाव्य का नाट्य रूपान्तर काफ़ी चर्चित हुआ हैं।

Important Links

Disclaimer

Disclaimer: Sarkariguider does not own this book, PDF Materials Images, neither created nor scanned. We just provide the Images and PDF links already available on the internet. If any way it violates the law or has any issues then kindly mail us: guidersarkari@gmail.com

About the author

Sarkari Guider Team

Leave a Comment