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समाचार पत्र में शीर्षक संरचना क्या है? What is the Headline Structure in a newspaper

समाचार पत्र में शीर्षक संरचना क्या है?
समाचार पत्र में शीर्षक संरचना क्या है?

अनुक्रम (Contents)

समाचार पत्र में शीर्षक संरचना क्या है?

शीर्षक संरचना- ‘शीर्षक’ किसी सूचना का मुख्य द्वार होता है। जिस प्रकार किसी भवन को भलीभाँति जानने का पहला माध्यम उसका प्रवेश द्वार उसका आकार-प्रकार, साज सज्जा, शिल्प-सौन्दर्य आदि भवन की आकृति का पर्याप्त परिचय करा देते हैं, उसी प्रकार सूचना के अन्तर्जगत का आभास उसके शीर्षक द्वारा हो जाता है। डॉ० हरिमोहन के शब्दों में “समाचार का शीर्षक समाचार का प्राण होता है।’ इसमें समाचार सार, घटना, परिणाम तथा स्थिति का संकेत निहित होता है। इसलिए समाचार का शीर्षक लिखना एक बुद्धिसम्मत और अभ्यासजन्य कला है। वह शाब्दिक पुकार है जो पाठक को अपनी ओर खींचती है। इसका उद्देश्य ही होता है- पाठक को तुरन्त आकर्षित करना, शीघ्रता से संक्षेप में समाचार के मूल भाव को बताना, रुचि के अनुसार समाचार ढूँढ़ने में पाठक की सहायता करना, उसे लोकप्रिय बनाना, उसकी विश्वसनीयता बढ़ाना, पृष्ठ सज्जा को आकर्षक बनाना आदि।

(समाचार फीचर लेखन एवं संपादन कला)- डॉ0 अर्जुन तिवारी ने अपनी पुस्तक आधुनिक पत्रकारिता में समाचार पत्रों में निम्नांकित शीर्षक रचनाओं को प्रयुक्त करना बताया है।

1. क्रास लाइन (The Cross Line) – इसे ‘की लाइन’ भी कहते हैं। समाचार पत्र के एक कॉलम या मध्य भाग में रखे गये केवल एक पंक्ति के लघु शीर्षक को क्रांस लाइन शीर्षक के नाम से जाना जाता है।

  • जैसे-

शिक्षक प्रदर्शन करेंगे।

2.ड्रॉप लाइन ( The Drop Line)- इसमें दो या कभी-कभी तीन पंक्तियाँ होती हैं। बायीं ओर से दायीं ओर को बढ़ाकर एक के बाद एक शब्द लिखे जाते हैं, जो सीढ़ीनुमा प्रतीत होते हैं। ड्राप लाइन को स्टेपहेतु भी कहते हैं।

  • जैसे-

अनियमित विद्युत आपूर्ति
उपभोक्ता परेशान
अधिकारी निश्चिन्त

3. विलोम सोपानी ( The Antidrop )- इस शीर्षक की पंक्तियाँ बायीं ओर से आरम्भ होकर क्रमशः नीचे की ओर होती जाती हैं।

  • जैसे-

प्रदेश के मुख्यमंत्री का
पद से हटाया जाना
प्रायः सुनिश्चित

4. पूर्णपाती ( The Full Line)- इसको समान रूप से बराबर रखा जाता है। समाचार पत्रों में इसका प्रायः प्रचलन है। शीर्षक के अक्षरों की संख्या एक कालम की चौड़ाई से अधिक नहीं होनी चाहिए-

उपराष्ट्रपति बम्बई में

5.फ्लशलेफ्ट (The Flush Left)- प्रथम पंक्ति तो बाईं ओर से शुरू होती है, पर दूसरी, तीसरी पंक्ति का क्रम अनिश्चित रहता है।

मुख्यमंत्री की
शिक्षकों के
विरुद्ध सख्त चेतावनी

6. विलोम स्तूपी ( The Inverted Pyramid)- इसमें स्तूप का निचला भाग ऊपर और ऊपरी भाग नीचे आ जाता है। पहली पंक्ति पूरे कॉलम की चौड़ाई में तथा दूसरी, तीसरी में दोनों तरफ ज्यादा स्थान छोड़ा जाता है-

नकली शराब फैक्ट्री में
पुलिस का छापा
पाँच गिरफ्तार

7.हैगिंग इण्डेशन (The Hanging Indention)- इसमें प्रथम पंक्ति पूरे कालम की होती है। दूसरी, तीसरी पंक्तियों को बाईं ओर समान स्थान छोड़कर लिखा जाता है।

शरद ऋतु में अकेले
एवरेस्ट विजय
का कीर्तिमान

8.स्क्वायर इण्डेशन ( The Squire indention)- पूरे कॉलम में फैले तीन या चार पंक्तियों वाला शीर्षक इण्डेशन कहलाता है। ब्रिटेन और अमेरिका में इसका प्रयोग अधिक होता है।

एक ही अदालत में
27 फर्जी जमानत
दाखिल करने वाला
अपराधी पकड़ा गया

9. कटि शीर्षक – डमरू अथवा युवती की कमर के समान शीर्षक ऊपर और नीचे चौड़े तथा मध्य में पतले शीर्षक को ‘कटि’ शीर्षक कहा जाता है। इसमें पहली और तीसरी पंक्तियाँ पूरी होती हैं, दूसरी पंक्ति दोनों तरफ से समान रूप से छोटी लिखी जाती है-

कर्मचारियों को दिए गए
आश्वासनों से
प्रशासन दुविधा में

10. कपाली शीर्षक – मुख्य शीर्षक के ऊपर छोटे टाइप में दिये जाने वाले शीर्षक को कपाली शीर्षक कहा जाता है इसके नीचे सीधा रूल डाल दिया जाता है।

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