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टिप्पणी के कितने प्रकार होते हैं ? How many types of comments are there?

टिप्पणी के कितने प्रकार होते हैं ?
टिप्पणी के कितने प्रकार होते हैं ?

टिप्पणी के कितने प्रकार होते हैं? 

विषय वस्तु के अनुसार टिप्पणी दो प्रकार की होती है-

(1) सामान्य टिप्पणी– सामान्य टिप्पणी के अर्न्तगत ऐसी टिप्पणी को लेते हैं जो दैनिक/रोजमर्रा की सामान्य समस्याओं पर बिना किसी छानबीन, नियम-उपनियमोल्लेख के लिखी जाती हैं। उदाहरण के लिए एक कार्यालय में ठण्डे पानी की व्यवस्था हेतु कूलर लगवाने के लिए लिखी जाने वाली टिप्पणियाँ को हम ले सकते हैं।

(2) सम्पूर्ण टिप्पणी- किसी भी जटिल मामले को सुलझाने के लिए जो ब्यौरेवार टिप्पणर लिखे जाते हैं, उन्हें सम्पूर्ण टिप्पण के अन्तर्गत इस मामले से सम्बन्धित सभी सूचनाओं, नियमों-उपनियमों, सन्दर्भो एवं तर्कों को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण के लिए किसी कर्मचारी की छुट्टियाँ बाकी नहीं हैं और वह प्रशासन से अग्रिम अवकाश की माँग करता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन यदि उसकी मदद करना चाहता है तो अग्रिम अवकाश स्वीकृत किये जाने के पक्ष में सामग्री एवं तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए टिप्पण प्रस्तुत करता है। ऐसे टिप्पण सम्पूर्ण टिप्पण कहे जाते हैं।

प्रतिपादन की दृष्टि से टिप्पण दो प्रकार के होते हैं-

(1) मुख्य टिप्पणी- किसी भी समस्या पर प्रस्तुत किया गया प्रारम्भिक टिप्पण मुख्य टिप्पण होता है। इस मुख्य टिप्पण में समस्या को पूरे विवरण के साथ प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कि उच्च श्रेणी के कर्मचारियों को समस्या के निराकरण हेतु किसी सूचना का अभाव न महसूस हो। मुख्य टिप्पण लचर या कमजोर होने पर उच्च श्रेणी के कर्मचारी एवं अधिकारी को नया मुख्य टिप्पण लिखना पड़ता है।

(2) आनुषंगिक टिप्पणी– मुख्य टिप्पण के आधार पर उच्च अधिकारियों द्वारा जो अभिमत प्रस्तुत किये जाते हैं, वे उस मुख्य टिप्पण के सन्दर्भ में आनुषंगिक टिप्पण कहे जाते हैं। भानुपगिक टिप्पण प्राय: छोटे होते हैं और मुख्य टिप्पण के समर्थन या विरोध में लिखे जाते हैं।

प्रसार की दृष्टि से भी टिप्पणी दो प्रकार की होती है-

(1) आन्तरिक टिप्पण- किसी एक कार्यालय या विभाग के अर्न्तगत कार्यरत कर्मचारियों द्वारा उत्तराधर क्रम से प्रस्तुत किये गये टिप्पण आन्तरिक होते हैं। सामान्य मसलों को विभागीय स्तर पर ही निपटा लिया जाता है और फाइल बाहर नहीं जाती है।

(2) बाह्य टिप्पण- जब समस्या काफी जटिल होती है और उसे निपटाने के लिए विभिन्न कार्यालयों को सम्मतियाँ माँगनी पड़ती हैं, तो विभागेत्तर लिखे गये टिप्पण बाह्य टिप्पण कहलाते हैं। उदाहरण के लिए शिक्षा मंत्रालय की किसी फाइल पर विधि मंत्रालय या वित्त मंत्रालय से ली गई टिप्पणी।

विस्तार की दृष्टि से भी टिप्पणी को दो वर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं-

(1) विस्तृत टिप्पण- इसके अन्तर्गत विचाराधीन मसले पर विस्तृत रूप में लिखा जाता है। सन्दर्भ, तर्क आदि क्रमिक रूप में प्रस्तुत करके विषय को स्पष्ट करते हुए पक्ष अथवा विपक्ष में संस्तुति की जाती है। मुख्य टिप्पण प्रायः विस्तृत ही होते हैं।

(2) सूक्ष्म टिप्पण- इसके अन्तर्गत सहमति, असहमति, स्वीकृति, अस्वीकृति, अनुरोध सूचक शब्द, आदेशसूचक शब्द मात्र लिखे जाते हैं।

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