
नये एवं पुराने शीत युद्ध में अंतर
नये एवं पुराने शीत युद्ध में निम्नलिखित अंतर हैं-
1. पुराने शीत-युद्ध में दोनों महाशक्तियों के बीच बराबरी बनाए रखना प्रमुख था जबकि नए शीत-युद्ध में प्रत्येक महाशक्ति विश्व राजनीति में अपना प्रभुत्व बनाए रखने की कोशिश में थी।
2. एक बड़ी परमाणु शक्ति के रूप में उभर कर आए चीन तथा फ्रांस ने नए शीत युद्ध को एक नया आयाम दिया।
3. नया शीत युद्ध पुराने शीत युद्ध से कहीं अधिक भयंकर था ।
4. पुराने शीत-युद्ध के तंग-द्वी-ध्रुवीकरण का स्थान अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में बहु केन्द्रवाद या द्वि-बहु केन्द्रवाद या कम से कम बहुत ही ढीले द्वि-ध्रुवीकरण ने ले लिया था।
5. नये शीत युद्ध का मुख्य केन्द्र एशिया था न कि यूरोप । पुराने शीत युद्ध का मुख्य केन्द्र यूरोप था।
6. नये शीत-युद्ध में अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में भाग लेने वाली देशों की संख्या में वृद्धि ने निश्चय ही नए शीत युद्ध की नीतियों को पुराने शीत युद्ध के युग से अलग कर दिया था। 7. नये शीत युद्ध में चीन भी शामिल हो गया था।
इसे भी पढ़े…
- शीत युद्ध का अर्थ | शीत युद्ध की परिभाषा | शीत युद्ध के लिए उत्तरदायी कारण
- शीत युद्ध के बाद यूरोप की प्रकृति में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। इस कथन की विवेचना करो ?
- शीतयुद्ध को समाप्त करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
- शीत युद्ध में अमेरिका और सोवियत संघ की भूमिका की विवेचना कीजिए।
- नवीन शीत युद्ध के स्वरूप एवं परिणामों की विवेचना करो?
- शीत युद्ध के विकास के प्रमुख कारणों की विवेचना करो।
- दितान्त अथवा तनाव शैथिल्य का अर्थ एवं परिभाषा | दितान्त के कारण
- अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर शीत युद्ध का प्रभाव की विवेचना कीजिए।
- शीत युद्धोत्तर काल के एक ध्रुवीय विश्व की प्रमुख विशेषतायें का वर्णन कीजिए।
- शीतयुद्धोत्तर काल में निःशस्त्रीकरण हेतु किये गये प्रयास का वर्णन कीजिए।
- तनाव शैथिल्य का प्रभाव | अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक व्यवस्था पर दितान्त व्यवहार का प्रभाव
- द्वितीय शीत युद्ध के प्रमुख कारण | नवीन शीत युद्ध के प्रमुख कारण | उत्तर शीत युद्ध के शुरू होने के कारक