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अवलोकन या निरीक्षण का अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ, उपयोगिता

अवलोकन या निरीक्षण का अर्थ
अवलोकन या निरीक्षण का अर्थ

अवलोकन या निरीक्षण का अर्थ एवं परिभाषा

अवलोकन या निरीक्षण का अर्थ किसी प्रकार की घटना को देखना, समझना और जरूरत के अनुसार घटना से जुड़ी हुई जानकारी को इकट्ठा करना है। सामाजिक अनुसंधान में अवलोकन शब्द का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। गुडे एवं हाट ने भी लिखा है, “विज्ञान का आरंभ अवलोकन से होता है और वास्तविकता की पुष्टि के लिए इस अवलोकन में ही लौटना चाहिए।”

1. श्रीमती पी. वी. यंग के अनुसार, “निरीक्षण को नेत्रों द्वारा सामूहिक व्यवहार एवं जटिल सामाजिक संस्थाओं के साथ-ही-साथ संपूर्णता की रचना करने वाली पृथक इकाइयों के विचारपूर्ण पद्धति के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है।”

2. सी. ए. मोजर के अनुसार, “ठोस अर्थ में निरीक्षण में काम तथा वाणी की अपेक्षा आंखों की स्वतंत्रता है।”

3. डोलार्ड के अनुसार, “अवलोकन अनुसंधान के एक प्राथमिक यन्त्र के रूप में मानव बुद्धि का अवलोकन तथा अनुभवों के आधार पर ज्ञान प्राप्त करता है।”

4. कुर्ट लेविन के अनुसार, “सभी प्रकार के अवलोकन अन्ततः घटनाओं के विशेष समूहों में वर्गीकरण होते हैं। वैज्ञानिक विश्वसनीयता सही प्रत्यक्षीकरण और वर्गीकरण पर आधारित होता है।”

अवलोकन / निरीक्षण की विशेषताएँ

1. प्रत्यक्ष अध्ययन- निरीक्षण में घटना या समस्या का अध्ययन प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। अनुसंधानकर्ता स्वयं घटना स्थल पर उपस्थित रहता है। स्पष्ट है कि अध्ययन विषय अध्ययनकर्ता में आमने-सामने का सम्बन्ध पाया जाता है।

2. सूक्ष्म व उद्देश्यपूर्ण अध्ययन- अवलोकन कार्य अनावश्यक व सतही तौर पर नहीं किया जाता है। अवलोकन कार्य पूर्व नियोजित व निश्चित उद्देश्य से प्रेरित होकर, विषय विशेष के गहन अध्ययन के लिए किया जाता है। स्पष्ट है कि अवलोकन मात्र नहीं है, अवलोकन देखने से आगे का कदम है। इसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण का भी समावेश व उद्देश्य में अन्तर होने के कारण विभिन्न निष्कर्षों पर पहुँचते हैं।

3. मानवीय इन्द्रियों का पूर्ण उपयोग- निरीक्षण प्रविधि की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि अनुसंधानकर्ता की इन्द्रियों का भरपूर प्रयोग किया जाता है। अवलोकन के समय अन्वेषक पूर्णरूप से सजग चैतन्य होता है। घटना को आँख से देखता है, मुँह से अन्य व्यक्तियों से प्रतिक्रिया जानने का प्रयास करता है तथा कान से व्यक्तियों के प्रति क्रिया या विचार को सुनता व संकलित करता है।

4. वैज्ञानिकता की भावना- अवलोकन की प्रविधि-वैज्ञानिकता की भावना से पूर्ण होती है। इसमें वैज्ञानिक पद्धति का पूर्ण ध्यान रखा जाता है। अनुसंधानकर्ता प्रत्यक्ष रूप से दिखायी देने वाली घटनाओं का ही संकलन करता है न कि अटकलपच्चू विचार।

5. कार्यकारण सम्बन्ध का अध्ययन- निरीक्षण प्रविधि का उद्देश्य घटना विशेष के बारे में कार्य-कारण सम्बन्ध को भी स्थापित करना होता है। अवलोकन में केवल घटना को ही न देखकर, इस घटना के घटित होने के कारणों को भी जानने का प्रयास किया जाता है।

6. समूह व्यवहार का अध्ययन- निरीक्षण प्रविधि का प्रयोग सामूहिक व्यवहार के अध्ययन के लिए किया जाता है। सामूहिक व्यवहार के अध्ययन के लिए यह एक उत्तम विधि है। प्रश्नावली, अनुसूची आदि द्वारा सामूहिक व्यवहार का अध्ययन करना कठिन कार्य है।

अवलोकन / निरीक्षण की उपयोगिता

सामाजिक घटनाओं की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते हुए सामाजिक वैज्ञानिकों ने सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में वैज्ञानिक विधि का प्रयोग करने के साथ-साथ तथ्यों को संकलित करने के लिए प्राकृतिक विज्ञानों से भिन्न प्रविधियों का भी आविष्कार किया है। निरीक्षण-प्रविधि सामाजिक घटनाओं के अध्ययन के लिए अपरिहार्य है, यह सामाजिक अनुसंधान के लिए अत्यन्त उपयोगी प्रविधि  है। इसमें अनुसन्धानकर्ता स्वयं तथ्यों को मौलिक रूप से अनुसंधान के लिए ही संकलित करता है अतः इसमें आंकड़ों की विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता व प्रामाणिकता बढ़ जाती है। गुडे व हाट ने इस संदर्भ में लिखा है, “विज्ञान निरीक्षण से ही आरंभ होता है और अन्तिम सत्यता के लिए निरीक्षण की ओर ही लौटता है।”

अवलोकन पद्धति की वैज्ञानिक उपयोगिता इसके द्वारा कार्य-कारण संबंधों को स्थापित करने में भी है। श्रीमती पी. वी. यंग के अनुसार, “निरीक्षण का उद्देश्य जटिल सामाजिक घटनाओं, सांस्कृतिक प्रतिमानों या मानव आचरण में विद्यमान महत्वपूर्ण अंतः संबंधित तत्वों की प्रकृति तथा सीमा का ज्ञान प्राप्त करना है। “

1. सरल प्रविधि- सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में आंकड़ों के संकलन की प्रविधियों में निरीक्षण की प्रविधि अत्यंत प्राथमिक तथा सरल है। थोड़े से प्रशिक्षण के बाद कोई भी व्यक्ति इस प्रविधि के माध्यम से तथ्यों का संकलन कर सकता है।

2. लोकप्रिय प्रविधि- निरीक्षण प्रविधि अत्यन्त लोकप्रिय प्रविधि है, प्राकृतिक व सामाजिक दोनों ही विज्ञान इसका प्रयोग करते हैं। मोजर का कथन स्पष्ट है, “व्यक्तियों की दैनिक क्रियाओं का निरीक्षण एक समाजशास्त्री को अन्य विधियों से कठिनाई से प्राप्त होने वाले तथ्यों को विश्वसनीय रूप में उपलब्ध करता है।”

3. उपकल्पना के निर्माण में प्रयोग- अवलोकन के समय अध्ययनकर्ता नवीन अनुभवों को प्राप्त करता है। नवीन साहित्य के सम्पर्क में आता है। ये तथ्य आगामी शोध हेतु परिकल्पनाओं के निर्माण में सहायक होते हैं।

4. वैज्ञानिक अध्ययन- विश्वसनीयता एवं सत्यापन सुविधा- अवलोकन की प्रविधि पूर्णतया वैज्ञानिकता की भावना का आदर करती है। अनुसंधानकर्ता स्वयं आंकड़े इकट्ठा करता है। इस प्रकार की प्रविधि द्वारा प्राप्त आंकड़े में पर्याप्त विश्वसनीयता पायी जाती है। इसके अतिरिक्त इन तथ्यों को सत्यापित भी किया जा सकता है। इस प्रकार हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि निरीक्षण प्रविधि शोध सामग्री के संकलन के लिए अत्यन्त उपयोगी प्रविधि है।

उपयुक्त विवरण से स्पष्ट है कि सामाजिक अनुसंधान में अवलोकन या निरीक्षण की उपयोगित बहुत ही महत्वपूर्ण है इसके गैर सामाजिक अनुसंधान में उपयोगी निष्कर्ष प्राप्त नहीं किये जा सकते।

निरीक्षण प्रविधि की सीमाएँ

1. सामाजिक घटनाओं की जटिल प्रकृति- अवलोकन प्रविधि की एक प्रमुख सीमा यह है कि जटिल व अस्पष्ट सामाजिक घटनाओं के प्रत्येक आयामों का निरीक्षण सम्भव नहीं हो पाता है। व्यक्ति के आन्तरिक विचारों को जानने के लिए अन्य प्रविधि का सहारा लेना पड़ता है। अतीत में घटित हुई घटनाओं का अध्ययन इस प्रविधि द्वारा नहीं किया जा सकता है।

2. मानव व्यवहार व निरीक्षण- मानव स्वभावतः शंकालु होता है। वह प्राय: अपने वास्तविक व्यवहार को छिपाने का प्रयास करता है। अवलोकन आदि के पता चल जाने पर तो उसके व्यवहार में पूर्णतया बनावटीपन आ जाता है। स्पष्ट है कि अवलोकन द्वारा मानव व्यवहार को समझना कोई आसान कार्य नहीं है।

3. वैयक्तिक दोष- अवलोकन प्रविधि का एक प्रमुख दोष यह है कि इसमें मानव इन्द्रियों द्वारा संकलित तथ्यों में प्रायः व्यक्तिगत दोष आ जाते हैं। प्रायः व्यक्ति घटनाओं की वास्तविकता से परे अवास्तविक चित्रण प्रस्तुत करता है। जान मैज ने लिखा है, “वास्तव में हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ अत्यधिक विभिन्नतापूर्ण, त्रुटिपूर्ण एवं विशिष्ट रूप में कार्य करती हैं। तुलनायें करने के लिए भी ज्ञानेन्द्रियाँ बुरी यन्त्र होती हैं।”

4. वैयक्तिकता का अभाव- निरीक्षण प्रविधि में व्यक्ति का सर्वाधिक अनुप्रयोग होता है और औपचारिक प्रविधियों या यन्त्रों का कम अवलोकन के समय व्यक्ति या अनुसन्धानकर्ता की व्यक्तिगत अभिरुचियों, मिथ्या झुकाव आदि का स्पष्ट प्रभाव देखा जाता है।

5. अनिश्चतता व प्रयोग की सीमा- सामाजिक घटनाओं की अनिश्चित प्रकृति भी निरीक्षण के अनुप्रयोग को सीमित करती है। पी० वी० यंग के अनुसार, “समस्त घटनाएँ निरीक्षण योग्य नहीं होतीं, निरीक्षण योग्य समस्त घटनाओं के घटित होने के समय निरीक्षणकर्ता उपस्थित नहीं हो पाता है तथा सभी घटनाओं का निरीक्षण प्रविधियों द्वारा अध्ययन सम्भव नहीं होता है।

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