गृहविज्ञान

मापक्रम क्या है? मापक्रम के निर्माण पर संक्षिप्त लेख लिखिए।

मापक्रम क्या है
मापक्रम क्या है

मापक्रम क्या है?

मापक्रम क्या है- मनोवृत्ति की माप के लिए समय-समय पर समाजवैज्ञानिकों ने कई प्रकार के मापक्रम विकसित किए। इन्हें हम ‘मनोवृत्ति मापक्रम’ (attitude scale) कहते हैं। 1929 ई० में थर्सटन (Thurstone) ने सर्वप्रथम एक युग्म- तुलना विधि (method of paired comparison) का विकास किया। लिकर्ट (Likert) ने 1932 ई० में योग-निर्धारण मापक्रम (summated rating scale) का विकास किया। बोगार्डस (Bogardus) ने थर्सटन से भी पहले 1925 ई0 में मनोवृत्ति को समझने के लिए एक विशेष प्रकार की विधि विकसित की, जो आगे चलकर सामाजिक दूरी मापक्रम (social distance scale) के नाम के प्रचलित हुआ । इनके अतिरिक्त गटमन (Guttman), एडवर्ड-किल्पाट्रिक (Edward & Kilpa-trick) आदि ने मनोवृत्ति के अध्ययन के लिए भिन्न-भिन्न मापक्रम विकसित किए।

कोई भी मापक्रम परिमापन का यंत्र है। परिमापन मुख्यतः गुणात्मक तथ्यों को संख्यात्मक श्रेणी में परिवर्तित करने की प्रविधि है। कलिंजर (Kerlinger) ने कहा है, ‘परिमापन का अर्थ है किसी वस्तु या घटना को नियमानुसार अंक प्रदान करना’ (Measurment is the assignment of nurnerals to objects or events according to rules)। अर्थात, परिमापन में एक विषय या घटना या वस्तु को विशेष नियम के अनुसार संख्यात्मक मूल्य प्रदान किया जाता है। मापक्रम (scale) वह यंत्र या उपकरण है, जिसके द्वारा परिमापन किया जाता है। इस तरह एक मापक्रम का उद्देश्य व्यक्ति घटना या वस्तु को एक अनुक्रम (continumum) पर संख्यात्मक स्थान प्रदान करना है।

मापक्रम के निर्माण पर संक्षिप्त लेख लिखिए।

सामान्यतः प्रत्येक मापक्रम के निर्माण में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है-

(i) अनुकूलम या सातत्य का निर्धारण (Determination of a continum) – मापक्रम के लिए एक अनुक्रम की आवश्यकता पड़ती है, जिसपर व्यक्ति या वस्तु की निम्नतम अंक से उच्चतम अंक के बीच कोई स्थान प्रदान किया जाए। सामाजिक अनुसंधान में विभिन्न मदों (items) को किसी नियम से अंक प्रदान किया जाता है और फिर तीव्रता की मात्रा के आधार पर इन मदों को निम्नतम बिंदु से उच्चतम बिंदु तक सजाकर एक अनुक्रम का निर्धारण किया जाता है।

(ii) वैधता या प्रामाणिकता (Validity)- कोई मापक्रम तब वैध या प्रामाणिक कहा जा सकता है; जब वह वही माप करता है, जो वह मापना चाहता है। यदि हम ‘कार्य संतुष्टि’ की माप के लिए मापक्रम विकसित करते हैं, या यदि वह मापक्रम ‘कार्य संतुष्टि’ की ही माप करता है, तो वह प्रामाणिक मापक्रम है। प्रामाणिकता की जाँच के लिए कई विधियाँ हैं; जैसे- तार्किक प्रमाणीकरण (logical validity or content validity); ज्ञातसमूह द्वारा प्रमाणीकरण (predic-tive and concurent validyt) आदि।

(iii) विश्वसनीयता (Relability)– किसी मापक्रम की विश्वसनीयता का अर्थ है उसकी स्थिरता एवं समानता। अर्थात, एक मापक्रम तभी विश्वसनीय है, जब वह विभिन्न समयों पर परिमापन में समान निष्कर्ष दे। एक प्रतिदर्श (sample) पर यदि हम एक मापक्रम से परिमापन करते हैं, और उसके द्वारा समान परिणाम प्राप्त हों तो वह मापक्रम विश्वसनीय है। विश्वसनीयता की माप के लिए परीक्षा एवं पुनः परीक्षा (test-retest), बहुल प्रपत्र (multiple form), अर्द्ध-भागी परीक्षण (split half) आदि विधियों का प्रयोग किया जाता है।

एक मापक्रम उस अनुक्रम को परिभाषित करता है, जिसपर व्यक्ति को नियमानुसार संख्यात्मक स्थान प्रदान किया जाता है। साथ ही, मापक्रम को प्रामाणिक एवं विश्वसनीय भी होना चाहिए। इस प्रकार, एक मापक्रम (scale) के तीन अंक हैं- (1) एक घटना, वस्तु या व्यक्ति जिसकी माप की जानी है), (2) संख्या (जो एक अनुक्रम पर न्यूनतम से अधिकतम तीव्रता के क्रम मे सजी है) और (3) एक नियम, जो घटना या वस्तु को अनुक्रम पर अंक या संख्या प्रदान करता है।

मनोवृत्ति मापक्रम – मनोवृत्ति की माप अप्रत्यक्ष रूप से किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति के प्रति व्यक्ति विशेष को प्रतिक्रियाओं या उनके संबंध में विभिन्न कथनों की अनुकूलता या प्रतिकूलता के आधार पर की जाती है। क्रेच एवं क्रेचफील्ड (Crecch and Cruthe-field) के अनुसार, ‘मनोवृत्ति मापक्रम कथनों या मदों का समूह है, जिसके प्रति व्यक्ति प्रत्युत्तर देता है।’ प्रत्येक दशा में इसका उद्देश्य एक अनुक्रम पर व्यक्ति को संख्यात्मक स्थान प्रदान करना है- वह स्थान यह बताता है कि किसी विशेष वस्तु के प्रति उसकी मनोवृत्ति की मात्रा क्या है। इस प्रकार, मापक्रम के कथन या मद मानकीकृत (standardise) किए जाते हैं और उनका मापक्रम अंक (scale value) निर्धारित किया जाता है, जो एक संस्थात्मक श्रेणी के रूप में अनुक्रम का निर्माण करते है। फिर, प्रत्येक मापक्रम या कथनों के सूह की विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता की जांच की जाती है और इस तरह वह ‘मापक्रम’ किसी वस्तु या घटना के प्रति मनोवृत्ति की माप के लिए तैयार होता है।

मापक्रम के कथन (Statements of Scale)- यह निश्चय करने के लिए कि कौन-से कथन या मद मापक्रम के लिए उपयुक्त है, क्रेच एवं क्रेचफील्ड ने निम्नलिखित आधारों की महत्वपूर्ण बताया है-

(1 ) विभेदीकरण कार्य (Discriminating function) – मापक्रम के लिए मदों या कथनों का चुनाव करते समय यह देखना चाहिए कि वे मद या कथन भिन्न मनोवृत्ति रखनेवाले व्यक्तियों में भेद या अंतर कर सकें। यदि किसी कथन से सहमति के आधार पर किसी व्यक्ति की मनोवृत्ति अनुकूल है, तो प्रतिकूल मनोवृत्तिवाला व्यक्ति उस कथन से सहमत नहीं होगा। अर्थात, उस कथन में विभेदीकरण का गुण है-उससे ‘सहमति’ या ‘असहमति’ के आधार पर ‘प्रतिकूल’ एवं ‘अनुकूल’ मनोवृत्तिवाले व्यक्तियों में अंतर किया जा सकता है।

(2) विभेदीकरण की तीक्ष्णता (Sharpness of discrimination)- माप- क्रम के कथन ऐसे होने चाहिए कि न केवल वह भिन्न मनोवृत्ति को स्पष्ट करें, बल्कि भिन्न मनोवृत्तिवाले व्यक्तियों को स्पष्ट रूप से अलग कर सकें। उसमें मिल जाने (overlapping) की संभावना न हो। अर्थात, कथनों में विभेदीकरण का गुण तीक्ष्ण हो।

(3) संपूर्ण मापक्रम पर विभेदीकरण (Discrimination along entire (scale)- मापक्रम के कथन में केवल अनुकूल एवं प्रतिकूल या पक्ष-विपक्ष के अंतर की ही क्षमता नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें सूक्ष्म विभेद करने की भी क्षमता अपेक्षित है अर्थात उसके आधार पर यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कौन कम अनुकूल हैं और कौन अधिक।

(4) अधिक विश्वसनीयता के लिए अधिक कथन ( Numerous items for high reliability)- अधिक कथन होने से मापक्रम की विश्वसनीयता बढ़ती है, चूँकि उससे परिमापन की अशुद्धियाँ रद्द (neutrialise) होती है।

मापक्रम के कथन दो प्रकार के होते हैं-

(i) मूल्यात्मक कथन (Evaluative statements), (ii) वर्णनात्मक कथन (Dsscriptive statements)।

मूल्यात्मक कथनों का संबंध व्यक्ति के ज्ञान विश्वास एवं भाव से होता है; जैसे- ‘हरिजन की उपस्थिति मेरे मन में घृणा उत्पन्न करती है।’ वर्णनात्मक कथन का संबंध मनोवृत्ति पर आधृत किया के वर्णन से है; जैसे—आप कुएँ पर स्नान कर रहे हैं, उसी समय कोई हरिजन वहाँ पानी भरने आता है, तो आप उसे पीटने लगते हैं।

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