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मानसिक मंदता | मंद बुद्धि के प्रकार | मंद बुद्धि बालकों की पहचान

मानसिक मंदता
मानसिक मंदता

मानसिक मंदता से क्या तात्पर्य है? (What do you mean by mental retardation?)

मानसिक मंदता के अंतर्गत वैसे बच्चे आते हैं जिनमें औसत से कम मानसिक योग्यता पाई जाती है लिहाजा वे मंद गति से सीखते हैं । स्कूल के औसत बच्चों की तुलना में पढ़ाई-लिखाई में पिछड़े रह जाते हैं। मानसिक मंदता, मानसिक न्यूनता, मानसिक अपसामान्यता और मानसिक विकलांगता आदि शब्द मानसिक मंदता के ही पर्यायवाची शब्द हैं। यह कोई मानसिक बीमारी नहीं बल्कि मानसिक विकास की अवस्था है जिसमें पीड़ित बच्चों का बौद्धिक विकास औसत बुद्धि वाले बच्चों से कम होता है विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने मानसिक मंदता की परिभाषा भिन्न-भिन्न तरह से दी है। लेकिन सबसे व्यापक परिभाषा मानसिक मंदन से संबंधित अमेरिकी संस्था द्वारा 1983 में दी गई परिभाषा है। इसके अनुसार – “मानसिक मंदन स्पष्ट रूप से औसत से कम ऐसी बौद्धिक प्रक्रिया है जिसके परिणामस्वरूप अनुकूली व्यवहार में संगामी अपसामान्यता आ जाती है या जो संगामी अपसामान्यता से जुड़ी होती है और जो विकासात्मक अवधि के दौरान अभिव्यक्त होती है।”

निःशक्त व्यक्ति अधिनियम, 1995 की धारा 2 (द) और राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 की धारा 2 (छ) के तहत मानसिक मंदता को परिभाषित किया गया है। इसके मुताबिक- ” मानसिक मंदता से किसी व्यक्ति के मस्तिष्क की अवरूद्ध या अपूर्ण विकास की दशा अभिप्रेत जो विशेष रूप से बुद्धि की अपसामान्यता अभिलक्षित होती है”

टरमैन रॉबिन्सन ने बुद्धिलब्धि के आधार पर निम्न सूची तैयार की है :

टेबुल : बुद्धिलब्धि के आधार पर बालकों का वर्गीकरण

बुद्धिलब्धि (I.Q.) श्रेणी
140-169 अत्यंत विलक्षण
120-139 विलक्षण
110-119 औसत से ऊपर
90-109 सामान्य
80-89 सामान्य से नीचे

मंद बुद्धि के प्रकार 

70-79 हीनबुद्धि
60-69 मूर्ख
50-59 मूर्ख
25-49 मूढ़
0-24 जड़

जबकि यूनेस्को ने विभिन्न श्रेणी के मानसिक मंद बालकों का निम्नलिखित विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया है:

श्रेणी प्रयुक्त शब्द बुद्धिलब्धि
गंभीर मानसिक मंदता जड़ बुद्धि 0-19
साधारण मानसिक मंदता हीन बुद्धि 20-49
मध्यम मानसिक मंदता दुर्बल बुद्धि 50-69
कम मानसिक मंदता मंद या पिछड़ा 70-85

व्यापकता (Prevalence)- राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन द्वारा वर्ष 2002 में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार देश में मानसिक मंद व्यक्तियों का अनुमानित संख्या 9.95 लाख है। यानी मानसिक मंद व्यक्तियों की आबादी कुल विकलांग आबादी के करीब 5 प्रतिशत है जिसमें करीब 3 प्रतिशत (6.26 लाख) पुरुष और 2 प्रतिशत (3.69 लाख ) महिलाएँ शामिल हैं।

मंद बुद्धि बालकों की पहचान (Indentification of Mentally Retarded Children)-

(i) मानसिक अयोग्यता से पीड़ित रहना।

(ii) बुद्धि लब्धि औसत बच्चों से कम होना।

(iii) संवेगात्मक अस्थिरता का शिकार होना।

(iv) सूक्ष्म चिन्तन नहीं कर पाना।

(v) शैक्षिक उपलब्धि बहुत कमजोर रहना।

(vi) सामाजिक व्यवहारकुशलता का अभाव होना।

(vii) अधिगम अक्षमता का शिकार होना।

(viii) असंवेदनशीलताग्रस्त हो जाना।

(ix) पढ़ाई-लिखाई में पिछड़े रहना।

(x) याददाश्त की कमी।

(xi) असावधान और अस्थिर रहना।

(xii) कक्षा में ठीक से ध्यान नहीं देना।

(xiii) तुरंत पुरस्कार पाने को लालायित रहना।

(xiv) असफलता से भयभीत रहना।

(xv) आंगिक सामंजस्य का अभाव रहना।

(xvi) आत्मविश्वास की कमी होना।

(xvii) एकाग्रता की कमी होना।

(xviii) शिक्षक की अवहेलना करना ।

मंदबुद्धि बालकों की पहचान कई तकनीकों द्वारा की जा सकती है। उदाहरणार्थ-शैक्षिक निष्पत्ति बुद्धि परीक्षण, शैक्षिक तथा शारीरिक आलेख पत्र एवं व्यक्ति-वृत्त अध्ययन आदि।

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