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छात्रालयाध्यक्ष के कर्तव्य (Duties of Hostel warden)- in Hindi

छात्रालयाध्यक्ष के कर्तव्य

छात्रालयाध्यक्ष के कर्तव्य

छात्रालयाध्यक्ष के कर्तव्य (Duties of Hostel warden)

छात्रालयाध्यक्ष के कर्तव्य (Duties of Hostel warden)- छात्रालयाध्यक्ष छात्रावास की सम्पर्ण व्यवस्था एवं उत्तम अनुशासन के लिए उत्तरदायी होता है। छात्रावास की उपयोगिता छात्रावास रक्षक के व्यक्तित्व , गुणों तथा योग्यताओं पर निर्भर करती है। वह छात्रावास की विस्था का नियंत्रण एवं निरीक्षण करने के साथ-साथ विद्यालय के अन्य कार्य भी करता है। विद्यालय छात्रावास का कोई भी क्रियाकलाप उनकी आँखों से ओझल नहीं हो सकता। छात्रावास रक्षक को छात्रावास में घर का स्वरूप निर्धारण करना पड़ता है, उसे बालकों के अभिभावक का  स्थान लेने के लिए सर्वोत्तम प्रकार का पथ प्रदर्शन, सहायता एवं परामर्श देना चाहिए। छात्रावास रक्षक का महत्वपूर्ण कर्तव्य यह है कि उसे छात्रावास में जनतांत्रिक वातावरण की स्थापना करें जिससे छात्रों में कर्तव्य परायणता, आत्मनिर्भरता एवं सहकारिता जैसे गुणों काविकास हो सके तथा छात्र अपने भावी जीवन में योग्य नागरिक सिद्ध हो सके।

छात्रालयाध्यक्ष के महत्वपूर्ण कर्तव्य निम्नलिखित हैं-

1. जिन कमरों में बालक रह रहे हैं उनमें प्रकाश एवं शुद्ध वायु का छात्रावास रक्षक को उचित प्रबन्ध करना चाहिए।
2. निवास गृह, रसोई, शौचालय एवं स्नानागार की सफाई की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
3. प्रत्येक बालकों को रहने के लिए छात्रावास में समान रूप से उचित स्थान देना चाहिए।
4. छात्रावास के बालकों के शारीरिक विकास हेतु छात्रावास रक्षक को व्यायाम, खेल-कूद आदि का उचित प्रबन्ध करना चाहिए।
5. छात्रावास में वाचनालय एवं पुस्तकालय की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
6. छात्रावास में रहने वाले बालकों के लिए सन्तुलित एवं पौष्टिक आहार की व्यवस्था करनी चाहिए।
7. छात्रावास में बालकों के पीने के पानी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि बालकों को स्वच्छ पानी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो सके।
8. समय-समय पर भोजनालय एवं रसोईघर की स्वच्छता एवं सफाई का निरीक्षण करना चाहिए।
9. छात्रावास में बालकों को राजगारपरक शिक्षा प्रदान करने की भी उचित व्यवस्था होती न हए ताकि छात्र रोजगार सम्बन्धी क्रिया कलापों में दक्षता प्राप्त कर सकें।
10. छात्रावास में उचित व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रबन्धन एवं संगठनकर्ता गुण प्राथमिकता देता है।
11. छात्रावास रक्षक सहयोगी, न्यायप्रिय, मृदुभाषी, धैर्यवान, निष्पक्षी आदि गुणों से परिपूर्ण को प्राप्त कर बालकों का नैतिक विकास करता है।
12. छात्रावास रक्षक में व्यक्तित्व से सम्बन्धित गुण जैसे-नेतृत्व करने की क्षमता, उच्च चरित्र, सहनशील एवं दूरदर्शिता आदि गुणों का होना भी अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि तभी वह बालकों को श्रेष्ठ नागरिक बना सकता है।
13. छात्रावास रक्षक में मानवों की मनोदशा एवं मानवीय सम्बन्धों को समझने की क्षमता होनी चाहिए।
14. छात्रावास रक्षक में अभिभावकों एवं शिक्षकों के साथ मधुर सम्बन्ध निरन्तर बनाये रखने की योग्यता होनी चाहिए।
15. छात्रावास रक्षक देशप्रेम की भावना से परिपूर्ण होने की शिक्षा देता है।

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