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अवलोकन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं , उपयोगिता, सीमाएँ

अवलोकन का अर्थ avlokan ka arth

अवलोकन अंग्रेजी के ऑबजरवेशन (Observation) का हिन्दी रूपान्तर है। शाब्दिक दृष्टि से इसका अर्थ है-निरीक्षण, विचार। यह “आब्जर्व” शब्द से बना है जिसका अर्थ ध्यान देना, परीक्षा करना, अनुष्ठान करना आदि। इसका सीधा अर्थ है आँखों से देखना ।

अवलोकन पद्धति की परिभाषा (Definition of Observation Method)

अवलोकन की विद्वानों ने जो परिभाषाएँ दी है, वे इस प्रकार है-

(1) पी.वी.यंग के अनुसार- अवलोकन नेत्रों के द्वारा किया गया विचारपूर्वक अध्ययन है. जिसका प्रयोग सामूहिक व्यवहार तथा जटिल सामाजिक संस्थानों के साथ-साथ सम्पूर्णता का निर्माण करने वाली पृथक-पृथक इकाईयों का सूक्ष्म निरीक्षर करने की एक पद्धति के रूप में किया जा सकता है।

(2) ऑक्सफोर्ड कन्साइज डिक्शनरी के अनुसार घटनाओं को उसी प्रकार देखना और वर्णन करना जिस प्रकार के कार्य-करण अथवा पारस्परिक सम्बन्धों के अनुसार स्वाभाविक रूप से घटते है।

(3) जहोदा एवं कुक के अनुसार (Jahode and Cook)- अवलोकन केवल दैनिक जीवन की ही अत्याधिक व्यापक क्रिया मात्र नहीं है, यह वैज्ञानिक जॉच का भी एक प्राथमिक यंत्र है।

इस प्रकार अवलोकन को सामाजिक अनुसंधान की एक पद्धति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें नेत्रों के माध्यम से सामाजिक घटनाओं को देखा और समझा जाता है।

अवलोकन पद्धति की विशेषताएँ (Characterstics of Observation Method)

उपरोक्त व्याख्या और परिभाषाओं को ध्यान में रखते हुए अवलोकन पद्धति की निग्न विशेषताएँ निर्धारित की जा सकती है-

(1) प्रत्यक्ष पद्धति- सामाजिक अनुसंधान की दो पद्धितियों हैं- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष । अवलोकन सामाजिक अनुसंधान की प्रत्यक्ष पद्धति है, जिसमें अनुसंधानकर्ता सीधे अध्ययन वस्तु को देखता है और निष्कर्ष निकालता है।

(2) प्राथमिक सामग्री का- सामाजिक अनुसंधान में जो सामग्नी संग्रहित की जाती है, उसे दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-प्राथमिक और द्वितीयक। अवलोकन के द्वारा प्रत्यक्षतः सीचे सम्पर्क और सामाजिक तथ्यों का संग्रहण किया जाता है।

(3) वैज्ञानिक पद्धति- सामाजिक अनुसंधान अन्य पद्धतियों की तुलना में अवलोकन पद्धति अधिक वैज्ञानिक है, क्योंकि इस पद्धति के द्वारा अपनी आँखों से देखकर सामग्री का संग्रहण किया जाता है। इसलिए उसमें विश्वसनीयता और वैज्ञानिकता रहती है।

(4) मानव इन्द्रियों का पूर्ण उपयोग- अन्य पद्धतियों की तुलना में इनमें मानव इन्द्रियों का पूर्ण रूप से प्रयोग किया जाता है। इससे सामाजिक घटनाओं को ऑखों से देखकर जॉच-पड़ताल की जा सकती है।

(5) विचारपूर्वक एवं सूक्ष्म अध्ययन- अवलोकन एक प्रकार से उद्देश्यपर्ण होता है। कोई भी अवलोकन क्यों न हो, उसका निश्चित उद्देश्य होता है।

(6) विश्वसनीयता- अवलोकन पद्धति अधिक विश्वसनीय भी होती है, क्योंकि इसमें किसी समस्या या घटना का उसके स्वाभाविक रूप से अध्ययन किया जाता है। इसलिए इसके द्वारा प्राप्त निष्कर्ष अधिक विश्वसनीय होते हैं।

(7) सामूहिक व्यवहार का अध्ययन- अवलोकन प्रणाली का प्रयोग सामूहिक व्यवहार के अध्ययन के लिए किया जाता है।

(8) पारस्परिक एवं कार्यकाकरण सम्बन्धों का ज्ञान- इसकी अन्तिम विशेषता यह है कि इसके द्वारा कार्य-कारण सम्बन्धों या पास्परिक सम्बन्धों का पता लगाया जाता है।

अवलोकन पद्धति के प्रकार (Types of Observation Method)

अवलोकन पद्धति के विभिन्न प्रकारों को निम्न तालिक में दिखाया जा सकता है-

अवलोकन पद्धति के प्रकार

अवलोकन पद्धति के प्रकार

अवलोकन पद्धति की उपयोगिता (Utility of Observation Method)

आधुनिक युग में सामाजिक अनुसंधान में अवलोकन पद्धति का सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। इसी से ऐसा स्पष्ट होता है किवह अत्यन्त ही उपयोगी पद्धति है। निम्न कारणों से इस पद्धति की उपयोगिता स्पष्ट होती है-

(1) सर्वाधिक प्रचलित पद्धति- यह सामाजिकजीवन के अध्ययन के लिए सबसे उपयोगी पद्धति है। इसी से स्पष्ट होता है कि सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में यह अत्यन्त ही उपयोगी है।

(2) सरल पद्धति- अन्य पद्धतियों की तुलना में यह सबसे अधिक सरल है। इसमें किसी घटना को नेत्रों की सहायता से जाँच-पड़ताल कर उसका अध्ययन करना होता है। इसलिए किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती है।

(3) प्राथमिक पद्धति- यह सभी पद्धतियों से प्राथमिक भी है। मानव आदिकाल को देखकर सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता रहा है। मानव स्वभाव से ही इस पद्धति को अपनाता आया है।

(4) विश्वसनीय पद्धति- अवलोकन पद्धति अत्यधिक विश्वसनीय भी होती है क्योंकि इसमें स्वयं देखकर सामाजिक घटनाओं के बारे में तथ्य एकत्रित किये जाते हैं। मोजर के अनुसार, व्यक्तियों की दैनिक जीवन के क्रियाओं का अवलोकन एक समाजशास्त्री को अन्य विधियों से कठिनाई से प्राप्त होने वाली सामग्री को विश्वसनीय रूप से उपलब्ध कराता है।

(3) सत्यापन योग्य पद्धति- अवलोकन पद्धति के द्वारा जो सामग्री एकत्रित की जाती है, उसकी पुनः जाँच की जा सकती है। अन्य पद्धतियों में इस प्रकार के अवसर प्राप्त नहीं होते हैं।

अवलोकन पद्धति की सीमाएँ (Limitations of Observation Method)

अवलोकन पद्धति में अनेक गुणों के होते हुए भी यह पद्धति दोषमुक्त नहीं है। इस पद्धति के प्रमुख दोष निम्न हैं-

(1) विश्वसनीयता का अभाव- अवलोकन पद्धति में अनुसंधानकर्ता घटनाओं को देखकर सूचनाएँ एकत्रित करता है। वह सामाजिकप्राणी होने के नाते सामाजिक घटनाओं के प्रति पक्षपात का दृष्टिकोण अपनाता है, जिससे तथ्य अविश्वसनीय हो जाते हैं।

(2) व्यवहारों की कृत्रिमता- अधिकांशतः ऐसा पाया जाता है कि जब व्यक्तियों का अध्ययन किया जाता है, तो अपने वास्तविक व्यवहार का त्याग कर देते हैं और बनावटी व्यवहार अपना लेते है। इसलिए यथार्थता का अवलोकन सम्भव नही हो पाता है।

(3) अव्यवस्थित अवलोकन- अवलोकन की भी वैज्ञानिक प्रणालियाँ होती है। अनेक बार इन प्रणालियों का प्रयोग न करके अव्यवस्थित ढंग से अवलोकन किया जाता है। इस प्रकार जो सामग्री प्राप्त होती है, उसकी वैज्ञानिकता पर विश्वास नहीं होता।

(4)अपर्याप्त घटनाएँ- कभी-कभी अत्यन्त ही कम घटनाओं का अवलोकन कर लिया जाता है और उन्हीं के आधार पर निष्कर्ष निकाल लिए जाते हैं, जिनमें विश्वसनीयता की कमी रहती है।

(5) अवलोकनकर्ता की अभिमति- अवलोकनकर्ता को अपनी धारणाएँ, विश्वास, मूल्य और विचार भी तटस्थता को समाप्त कर देते हैं और इस प्रकार अध्ययन अविश्वसनीय हो जाता है।

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