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On Running After One’s Hat Summary of the Essay In English And Hindi

On Running After One’s Hat Summary of the Essay In English And Hindi
On Running After One’s Hat Summary of the Essay In English And Hindi

On Running After One’s Hat Summary of the Essay In English And Hindi

On Running After One’s Hat Summary of the Essay-The London Flood- The writer felt surprised on hearing that London had been flooded in his absence. He was happy that his own most beautiful locality, Battersea, too under water. It looked a lovely romantic town under water. The meat boat would have sailed smoothly in the lanes of flowing water. The greengrocer would have enjoyed the trip in the boat. A district under flood, according to the writer, would have looked a group of beautiful islands with a beautiful natural scene.

Romantic Views of Flood-The writer says that some persons regard such romantic views of flood, or fire wanting in reality. He says that a true optimist should see an opportunity for enjoyment in such things. The writer fully supports such happy and hopeful view. Toothache, or the case of being burnt at Smith field, inspite of real pain, may be rarely enjoyed. He calls all these cries of men, or women only sentimental, or imaginative inconveniences. Many persons complain of the late arrival of trains at a station which, like a young boy, is a source of pleasure and enjoyment for the writer. Quoting John Milton he says, “They also serve who only stand and wait.” He again says, “Many of the most purple hours of my life have been passed at Clapham junction, which is now, I suppose, under water.’

The Running after One’s HatSome people think it funny to run after one’s hat. He does not call it a proper thing. The same people run much faster in games and sports. It is wrong to call such running comic. It is certainly comic but man is also a very comic creature. Most comic things are most worth doing such as making love. A man running after a hat is not half so funny as a man running after a wife.

That Hat-hunting as the Jolliest Sport–The running after one’s hat is the jolliest sport. The writer says that hat-hunting shall be the sport of the upper classes in future. It shall be at a high place where gentiemen and ladies shall meet together in the morning. It shall be the sport with the maximum pleasure and recreation for all present there. The writer saw an oldman running after his hat in the Hyde Park where both the people and he himself were enjoying the sport with maximum pleasure and recreation.

The Struggle is Exciting-The same principle can be applied to any other domestic worry. For example, fishermen sit by dark pools enjoying patiently their fish-catching. In the same way, some people of very modern views make use of theological terms to lessen their distress. The struggle is exciting to those who face it with courage and pleasure.

The Need of the Spirit of Adventure-The writer asserts that with the same ideas in view even the floods of London could be enjoyed. Such an inconvenience may be regarded as the accidental aspect of an exciting situ- ation. An adventure is only an inconvenience rightly understood. The flood water in the great city of London should have been taken in that light. A Roman Catholic once said, “Wine is good with everything except water, and on the similar principle, water is good with everything except wine.”

 

निबन्ध का सारांश

लन्दन नगर की बाढ़-लेखक को इस बात के समाचार को सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसकी अनुपस्थिति में लन्दन नगर में बाढ़ आ गयी है। उसको इस बात से बड़ी प्रसन्नता थी कि उसकी अत्यधिक सुन्दर कॉलोनी, ‘बेटरसी’ भी पानी से लबालब हो गयी है। पानी में डूबने पर वह नगर सुन्दर एवं मनोरन लग रहा था। माँस से भरी हुई नाव भी जल प्लावित गलियों में घरों तक सरलता से पहुँच सकती थी। पंसारी भी नाव में बैठकर अपनी यात्रा का आनन्द लूट सकता था। बाढ़ के कारण वह जनपद के सुन्दर द्वीप सुन्दर प्राकृतिक दृश्य का रूप धारण कर रहे थे।

बाढ़ का मनोरम दृश्य- कुछ लोग का यह मत है कि बाढ़, अथवा आग लगने के दृश्य सत्यता से भिन्न लगते हैं। लेखक का यह मत है कि आशावादी व्यक्ति को इस प्रकार की बाढ़, अथवा आग लगने की घटनाओं में आनन्द लूटने के अवसर के उपयोग से भी वंचित नहीं करना चाहिए। लेखक इस प्रकार के सुखद एवं आशावादी अवसर के आनन्द का पूर्ण समर्थन करता है। दाँत के दर्द अथवा स्मिथ फील्ड के स्थान पर धर्म-विरोधियों का आग में जलाए जाने के दृश्य का भी कभी-कभी आनन्द लेना चाहिए। वह स्त्रियों तथा पुरुषों को उक्त अवसर पर निकाली गयी चीखों को भावपूर्ण एवं कल्पनापूर्ण ही समझता है। अनेक लोग स्टेशन पर देर से आने वाली रेलों की शिकायत करते हैं परन्तु लेखक स्वयं, एक नवयुवक की तरह, आनन्द एवं मनोरंजन का साधन मात्र समझता है। ‘जॉन मिल्टन’ के शब्दों को व्यक्त करते हुए लेखक इस बात को स्पष्ट करता है कि “ईश्वर की सेवा वे लोग भी करते हैं जो उसकी सेवा में शान्तिपूर्वक खड़े रहते हैं तथा अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहते हैं।” वह आगे कहता है, “मेरे जीवन का अधिकांश महत्वपूर्ण समय अथवा युवाकाल क्लेइम जंक्शन’ पर रेलगाड़ियों के आगमन की प्रतीक्षा करने में बीता है।”

टोप के पीछे भागना-कुछ लोग अपने टोप के पीछे भागने की क्रिया को हास्यपूर्ण समझते हैं परन्तु लेखक इस बात तथा उनके इस प्रकार के दृष्टिकोण को उचित नहीं मानता है। वे ही लोग खेलकूद में बहुत तेज गति से दौड़ते हैं। इस प्रकार के उनके दौड़ लगाने को गलत नहीं कहा जा सकता है। यदि हम उनके दौड़ लगाने को हास्यपूर्ण कहें, तो यह भी कहना पड़ेगा कि मनुष्य भी हास्यप्रद प्राणी है। यह भी हमको स्मरण रखना चाहिए कि अनेक हास्यपूर्ण बातें ऐसी होती हैं जो सबसे अधिक करने योग्य होती हैं जैसे कि किसी से प्रेम करना भी हास्यप्रद क्रिया है। किसी टोप के पीछे दौड़ना अपनी पत्नी के पीछे दौड़ने से आधा भी हास्यप्रद नहीं होता है।

टोप के पीछे भागना अत्यधिक आनन्ददायक खेल है- यदि कोई व्यक्ति अपने टोप को लेने के लिए उसके पीछे भागता है तो वह खेल उसके लिए सर्वाधिक आनन्ददायक होता है। लेखक का यह कहना है कि भविष्य में उच्च वर्ग के लोग भी इस प्रकार के खेल में भाग लेना आरम्भ कर देंगे। इस प्रकार का खेल वे किसी ऊँचे स्थान पर खेलेंगे जहाँ पर अनेक भद्र पुरुष एवं महिलाएँ एकत्रित हो जाया करेंगी। इस प्रकार के खेल में समस्त उपस्थित स्त्री-पुरुष अधिकतम आनन्द एवं मनोरंजन प्राप्त करेंगे। लेखक ने एक वृद्ध को ‘हाइड पार्क’ में अपने टोप के पीछे दौड़ते हुए देखा जिसमें सभी दर्शक तथा वह स्वयं अधिकतम आनन्द तथा मनोरंजन लूट रहे थे।

संघर्ष मनोरंजन लगता है- वही सिद्धान्त किसी अन्य घरेलू चिन्ता के मामले भी लागू होता है। उदाहरण के लिए, मछली पकड़ने वाले मछुआरे अन्धकारपूर्ण तालाबों के किनारे पर बैठ जाते हैं तथा धैर्यपूर्ण तरीके से मछलियाँ पकड़ने के लिए कार्य में संलग्न रहे आते हैं। उसी प्रकार से, आजकल कुछ लोग ऐसे हैं जो आधुनिक विचारधारा रखते हैं तथा अपने दुःख-दर्द को घटाने के लिए धार्मिक कथनों का उच्चारण करते रहते हैं। संघर्ष उन्हीं लोगों को अधिक मनोरंजन लगता है जो साहस एवं आनन्द के साथ संघर्ष का सामना करते हैं।

साहसपूर्ण भावना की आवश्यकता-उसी विचार को दृष्टिगत रखते हुए लेखक इस बात को बलपूर्वक स्पष्ट करता है कि लन्दन नगर की बाढ़ का भी आनन्द लूटा जा सकता था। यदि किसी प्रकार की कोई भी असुविधा हो तो उत्तेजनापूर्ण स्थिति को दुर्घटनायुक्त पहलू समझा जा सकता है। कोई भी साहसपूर्ण कार्य एक ऐसी असुविधा है जिसको अच्छी तरह से तथा सही ढंग से समझा जाना चाहिए। लन्दन नगर के अन्दर भरे हुए बाढ़ के पानी को भी उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए था। एक बार रोमन कैथोलिक धर्म के एक अनुयायी ने यह कहा था, “शराब पानी के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु में मिलाकर उत्तम लगती है तथा उसी सिद्धान्त के अन्तर्गत, पानी भी शराब को छोड़कर किसी अन्य वस्तु ले साथ मिलाकर पीने से अधिक उत्तम तथा स्वादिष्ट लगता है।”

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