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प्रतिभाशाली बालकों का अर्थ व परिभाषा, विशेषताएँ, शारीरिक विशेषता

प्रतिभाशाली बालकों का अर्थ व परिभाषा

प्रतिभाशाली बालकों का अर्थ– वह बालक जिसकी मानसिक आयु अपनी आयु वर्ग के अनुपात में औसत से बहुत अधिक हो, उसे प्रतिभावान या प्रतिभाशाली बालक कहा जाता है। संगीत, कला या किसी अन्य क्षेत्र में अत्यधिक योग्यता रखने वाला बालक भी प्रतिभाशाली बालकों की श्रेणी में आता है। प्रतिभावान बालक ही राष्ट्र के नेता, समाज सुधारक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, साहित्यकार व रचनाकार आदि बनते हैं।

प्रतिभाशाली बालक की परिभाषा

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रतिभावान बालक बुद्धि के साथ-साथ शारीरिक रूप से, व्यक्तित्व रूप से तथा समायोजन की दृष्टि से भी श्रेष्ठ होते हैं।

हैविंगहर्स्ट (Havighurst) के विचारानुसार, “ प्रतिभाशाली बालक वे हैं जो समाज के किसी भी कार्यक्षेत्र में निरन्तर कार्यकुशलता का परिचय देते हैं।”

अब्दुल रऊफ (Abdul Rauaf) के अनुसार, “प्रायः उच्च बुद्धिलब्धि को प्रतिभाशाली होने का संकेत माना जाता है। अतः ‘प्रतिभाशाली बालक’ शब्द का अभिप्राय बालक की उच्च बुद्धिलब्धि से किया जाता है।”

प्रेम पसरीचा ने प्रतिभाशाली बालक को इस प्रकार से परिभाषित किया है- “जो सामान्य बुद्धि की दृष्टि से श्रेष्ठ प्रतीत हो या उन क्षेत्रों में जिनका अधिक बुद्धिलब्धि से सम्बन्धित होना जरूरी नहीं, अति विशिष्ट योग्यताएँ रखता हो।”

टरमन के अनुसार, “प्रतिभाशाली बालक वह है जिसकी बुद्धिलब्धि 140 है।”

कोलेसनिक के अनुसार, “वह प्रत्येक बालक जो अपने आयु स्तर के बच्चों में किसी योग्यता में अधिक हो और जो हमारे समाज के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण नया योगदान कर सके।”

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रतिभाशाली बालक जिनकी बुद्धिलब्धि 140 से अधिक होती है, समाज में प्रायः 2 से 4 प्रतिशत ही होते हैं। ये सामान्य बालकों से हर क्षेत्र में योग्य होते हैं व इनकी शैक्षिक उपलब्धि भी अधिक होती है। प्रतिभाशाली बालक समाज में अपने आपको अन्य सामान्य बालकों की अपेक्षा जल्दी सामायोजित कर लेते हैं।

प्रतिभाशाली बच्चों की विशेषताएँ

प्रतिभाशाली बालक राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। ये समाज के हर कोने में पाये जाते हैं। ये किसी भी जाति, धर्म, लिंग और किसी भी समुदाय से सम्बन्धित हो सकते हैं। बहुत-से विकलांग बच्चों, जैसे- गूंगे-बहरे अस्थि बाधित, वाणी और भाषा सम्बन्धी दोष वाले बच्चों में भी प्रतिभाशाली बच्चे देखने को मिलते हैं। हमारे सामने इतिहास के पन्नों में छिपे हुए ऐसे बहुत-से उदाहरण आते हैं जो अपने प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं, जैसे- ग्राहम बेल, थामस एडीसन जॉर्ज वाशिंगटन आदि कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं जो अपनी-अपनी अधिगम असमर्थताओं के लिए जाने जाते हैं। सूरदास जो जन्मांध थे, मिल्टन व ब्रीटहोवन (Breethoven) आदि भी गम्भीर दृष्टि का श्रवण बाधित के कारण प्रतिभाशाली लोगों की श्रेणी में आते हैं। हम बहुत-से ऐसे नामों को भी जानते हैं, जिनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होते भी उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में नाम व प्रसिद्ध कमायी है। अतः प्रतिभाशाली बच्चे केवल बुद्धि में उत्तम नहीं होते बल्कि शारीरिक, संवेगात्मक, सामाजिक शिक्षा तथा अपनी आयु के कई बच्चों से कई और विशेषताओं में भी उत्तम होते हैं।

प्रतिभाशाली बच्चों की शारीरिक विशेषता

शारीरिक विशेषताएँ (Physical Characteristics)– प्रतिभाशाली वे बच्चे होते हैं जो शारीरिक तौर पर विकसित होते हैं। ये सामान्यतः लम्बे होते हैं व इनका वजन ज्यादा होता है।

(1) इनका डील-डौल उचित होता है और वे अच्छे स्वास्थ्य वाले होते हैं।

(2) इनकी ज्ञानेन्द्रियाँ प्रखर होती हैं।

(3) इनका व्यवहार बहुत अच्छा होता है।

(4) ये साधारण बच्चों की अपेक्षा बैठना, खड़े होना, दाँत निकालना तथा बोलना छोटी आयु में ही सीख जाते हैं।

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